चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
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शहर के रेड लाइट एरिया मीरगंज से हटाई गईं सेक्स वर्कर्स के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि यदि यहां से हटाए गए लोग देह व्यापार छोड़ने का भरोसा दें तो अदालत उनके सील मकानों को खोलने का आदेश देने पर विचार करेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचीगण को हलफनामा देना होगा, वह उन मकानों का उपयोग सिर्फ निवास करने के लिए करेंगी, वहां किसी बाहरी व्यक्ति को बुलाकर कोई दूसरा काम नहीं किया जाएगा।
सत्यभामा और दो अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए सात दिसंबर की तिथि नियत की है। याचिका में कहा गया कि जिला प्रशासन ने गत दिनों मीरगंज क्षेत्र में छापा मारकर बहुत से मकान सील कर दिए। वहां रह रहे लोगों को घर से निकाल दिया गया। याची मकान संख्या 56/73 की मालकिन है। इसी मकान के भूतल में अंजली सामंत का घर है। देह व्यापार की शिकायत पर पुलिस अंजली सामंत के साथ ही उसका मकान भी सील कर दिया, जबकि उसके खिलाफ देह व्यापार में लिप्त होने की शिकायत नहीं है।
याची के अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र ने कहा कि पुलिस आरोप साबित हुए मकान सील नहीं कर सकती है। दूसरे पुलिस को सिर्फ अंजली सामंत का मकान ही सील करना चाहिए, वह भी आरोप साबित होने के बाद क्योंकि उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है। याची को जबरन मकान से बाहर कर दिया गया। उसे 30 अप्रैल को नोटिस दिया गया और एक मई को मकान सील कर दिया गया। स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय का कहना था कि याची और अंजली सामंत का मकान एक ही है। मकान का बंटवारा नहीं होने और प्रवेश एक ही होने के कारण पूरा मकान सील करना पड़ा। बता दें कि मीरगंज एरिया में देह व्यापार की गंभीर शिकायतों के बाद पुलिस और जिला प्रशासन ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए ऐसे सभी मकानों को खाली कराकर सील कर दिया, जिनमें देह व्यापार होता था।