देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, काले धन के खिलाफ केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले को बॉलीवुड निर्देशक महेश भट्ट ने परियों की कहानी सरीखे बताया है। उनका कहना है कि परियों की कहानी हम भी सुनाते हैं और केंद्र सरकार भी सुना रही है। किस्से-कहानी सुनने के आदी हम सब हैं, इसलिए सुनते रहिए।
महेश भट्ट शुक्रवार को इलाहाबाद में सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। नोटबंदी पर मुल्क के हालात पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी निर्णय लें तो यह देखना चाहिए कि सबसे कमजोर व्यक्ति को इससे दिक्कत तो नहीं है, तभी निर्णय सही होता है। टीवी और अखबारों के माध्यम से उन्हें पता चला कि गांवों में हालात काफी खराब हैं। लोग समझ ही नहीं पा रहे है कि ये जो काली रात उभरी है, उसकी सुबह कब होगी। उनकी बात सरकार तक पहुंचाना हम सबका कर्तव्य है। हालांकि मुंबई के जिस हिस्से में वह रहते हैं, वहां ऐसी दिक्कत नहीं है।
बताया कि नोटबंदी के असर से फिल्म जगत भी अछूता नहीं है। कई बार शूटिंग कैंसल हुई है। दिहाड़ी पर काम करने वाले कर्मचारियों को मेहनताना देने में भी दिक्कतें आ रही हैं। नोटबंदी से देश में जो माहौल है उस पर फिल्म बनाने की बात पर उन्होंने कहा कि हमारा काम मनोरंजन करना है। कुछ ऐसा झूठ बोलना जो लोगों को पसंद आए। हालांकि, रियलस्टिक फिल्में बनती हैं, लेकिन वो उतना बिजनेस नहीं करतीं। महेश भट्ट ने यह भी कहा कि चुनाव में अगर किसी पार्टी को आपने वोट दिया है तो उसके फैसले को भी एक हद तक स्वीकार करना चाहिए। उसके बाद आवाज उठाने का हक तो सबको है।