बुलंदशहर के डिबाई थाने में 25 मई 2004 को दिनेश के बेटे बंटी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था रंजिश के चलते रात में ट्यूबवेल पर सो रहे परिवार के कुंवर सिंह, संतोष, दिनेश और जालिम सिंह की हत्या कर दी गई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुलंदशहर के चार लोगों की हत्या में ट्रायल कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा पाए छह लोगों को बरी कर दिया। कहा-अभियोजन पक्ष मामले को साबित नहीं कर पाया। गवाहों के बयान और साक्ष्य में भिन्नता पाई गई। यह फैसला न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और मयंक कुमार जैन की पीठ ने दिया है।
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बुलंदशहर के डिबाई थाने में 25 मई 2004 को दिनेश के बेटे बंटी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था रंजिश के चलते रात में ट्यूबवेल पर सो रहे परिवार के कुंवर सिंह, संतोष, दिनेश और जालिम सिंह की हत्या कर दी गई। ट्रायल कोर्ट ने 30 जून 2007 को मामले के छह आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों व दलीलों के आधार पर कहा कि अभियोजन पक्ष यह स्थापित करने में विफल रहा है कि घटना के प्रकाश का क्या स्रोत था, जिसमें गवाहों ने आरोपियों की पहचान की। गवाहों ने अपीलकर्ताओं को टॉर्च की रोशनी में पहचानने की बात कही। लेकिन, जांच अधिकारी ने टॉर्च पेश करने में विफल रहे। लिहाजा, याचिकाकर्ता वेद उर्फ वेदपाल, गंगा, जगन, प्यारे, राकेश और बबलू उर्फ बलुआ को बरी कर दिया गया।