छह करोड़ रुपये सिर्फ शहरवासियों के
साइबर पुलिस की जांच में सामने आया कि शहर क्षेत्र के रहने लोगों के लगभग छह करोड़ रुपये ठगों के बैंक खातों में हैं। इसके अलावा पचास के करीब गंगापार और यमुनापार के लोगों के फंंसे हैं। अपने पैसों की वापसी के लिए आए दिन पीड़ित साइबर सेल में चक्कर काटते रहते हैं। ताकि उनको अपना पैसा वापस मिल सके। साइबर सेल पुलिस अफसरों का कहना है कि पैसा दिलाने के लिए पूरा प्रयास किया जाता है।
फर्जी पते या फिर खरीदे हुए होते हैं खाते
साइबर पुलिस की जांच में सामने आया कि ठगों सिर्फ उन्हीं बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं, जिनका रिकार्ड मिलना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि, नाम पता सामने आने पर पता चलता है कि फर्जी दस्तावेजों से खाता खुलवाया गया है। या फिर गरीब तबके के लोगों को पैसा देने का लालच देकर बैंक खाते खरीदे हुए होते हैं। इन खातों को फ्रीज कराने के अलावा कोई दूसरी ऑप्शन नहीं होता है।
इन राज्यों से जुड़े तार
जांच में पता चला है कि अधिकतर बैंक खाते झारखंड, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बंगाल, महाराष्ट्र, ओडिशा, हरियाणा, तेलंगाना, हैदराबाद, दिल्ली के होते हैं। अधिकतर ठग जालसाजी करने के बाद फौरन पैसा निकाल लेते हैं। लेकिन, कई बार वक्त से शिकायत मिलने पर फौरन खाते को फ्रीज करवा दिया जाता है। ताकि पीड़ित का पैसा सुरक्षित रहे।
ऐसे फ्रीज करती है पुलिस बैंक खाता
ठगी के बाद खाते में जाने वाले पैसों को साइबर पुलिस निगरानी करती है। जैसे ही दूसरे खाते में पैसा गया तो उसे भी बैंक के माध्यम से फ्रीज करवा देती है। अगर लंबे समय से पैसा अगर खाते से नहीं निकाला जाता है तो साइबर पुलिस कोर्ट में केस फाइल करती है। यहां से बैंक को आदेश जारी होने पर पीड़ित के ठगी का रकम वापस कराया जाता है। लेकिन, अगर ठगी के बाद तुरंत पैसा निकाले गए हैं तो पुलिस ठगों के पकड़े जाने के बाद ही पैसा वापस करा सकती है।
आप न हो ठगी के शिकार
मोबाइल पर आए अंजान लिंक पर क्लिक न करें
पैसा कमाने का लालच देने वाले से दूर रहे
सस्ते ऑनलाइन शॉपिंग करने से बचना चाहिए
ऑनलाइन नौकरी लेने से पहले अच्छी तरह जांच करें
वीडियो शेयर और लाइक करने वाले मैसेज से दूर रहे