kanwar devotee offer prayer in piran kaliyar dargah
- फोटो : amar ujala
शुआट्स में हिंदू और मुस्लिम छात्रों के लिए अलग से धार्मिक प्रार्थना कराए जाने की मांग करना एक शोध छात्र को महंगा पड़ गया और शुआट्स प्रशासन ने छात्र को सस्पेंड कर दिया। छात्र का आरोप है कि उसने पहले शुआट्स प्रशासन को ज्ञापन देकर पहले धार्मिक प्रार्थना कराए जाने की मांग की थी और जब प्रशासन इसके लिए राजी नहीं हुआ तो राष्ट्रगान कराने की मांग की लेकिन प्रशासन ने इससे भी इनकार कर दिया और सोमवार को उसे सस्पेंड कर दिया गया। वहीं, प्रशासन का दावा है कि छात्र विश्वविद्यालय परिसर में अराजकता का माहौल उत्पन्न कर रहा था और इसी वजह से उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि कार्रवाई के बाद सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने हंगामा भी किया।
मामला तीन अप्रैल को उस वक्त शुरू हुआ जब शुआट्स से पीजी मैनेजमेंट का शोध छात्र अभय गोस्वामी साथी छात्रों के साथ कुलसचिव को ज्ञापन देने पहुंचा। छात्रों का कहना था कि डिवेशन सेशन में बाइबिल प्रार्थना होती आ रही है। लंबे समय से संस्थान में हिंदू और मुस्लिम छात्रों की मांग रही है कि डिवोशन सेशन में उनकी धार्मिक प्रार्थनाएं भी शामिल कराई जाएं। छात्रा का आरोप है कि संस्थान ने उसकी मांग नहीं मानी, जिस पर छात्र ने विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के गठन और राष्ट्रान कराए जाने की मांग उठाई। छात्रों को वार्ता के लिए 10 अप्रैल को बुलाया गया लेकिन सोमवार को छात्र जब वार्ता करने पहुंचा तो उसे निलंबन पत्र दे दिया गया।
उधर, शुआट्स के पीआरओ रमाकांत दुबे का कहना है कि यहां कोई प्राइमरी स्कूल नहीं है। संस्थान में 14 से 15 हजार छात्र हैं। इतनी जगह नहीं है कि छात्रों को एक जगह इकट्ठा कर धार्मिक प्रार्थना या राष्ट्रगान का आयोजन किया जाए। संस्थान भी राष्ट्रगान का पूरा सम्मान करता है। यह हमारे देश की पहचान है। जिस छात्र को सस्पेंड किया गया, वह अनैतिक कार्यों में लिप्त था, अफवाह फैला रहा था और बाहरी तत्वों को लाकर विश्वविद्यालय परिसर में अराजकता की स्थिति उत्पन्न कर रहा था। इसी के मद्देनजर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। बाइबिल प्रार्थना में भी आने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जाता और न ही दबाव बनाया जाता है। जिसकी आस्था होती है, वही इस प्रार्थना में शामिल होता है।