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प्राइवेट प्रैक्टिस पर सख्ती के बाद डॉक्टर एनएन गोपाल ने दिया इस्तीफा

Tue, 11 Apr 2017 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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Doctor shimla
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प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों पर की जा रही सख्ती से चिकित्सकों में खलबली मची है। ऐसे सरकारी डॉक्टर अब सरकारी नौकरी छोड़ने लगे हैं। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग से इसकी शुुरुआत भी हो गई। सोमवार को विभाग में प्रोफेसर डॉ एनएन गोपाल ने प्राचार्य को इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि पत्र में उन्होंने नौकरी छोड़ने का कारण व्यक्तिगत बताया है लेकिन माना जा रहा है कि यह शासन की सख्ती का ही असर है। दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज के कई अन्य नामचीन डॉक्टर भी नौकरी छोड़ने की तैयारी में हैं।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुछ दिन पहले लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में सरकारी डॉक्टरों को प्राइवेट प्रैक्टिस न करने की चेतावनीपूर्ण हिदायत दी थी। इसके बाद सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में विभागाध्यक्षों, सीएमओ ने सख्ती शुरू कर दी। प्राचार्य ने ओपीडी का औचक निरीक्षण किया तो कई डॉक्टर अनुपस्थित मिले। सभी को नोटिस जारी किया गया। अमर उजाला ने सरकारी डॉक्टरों की अस्पतालों से गैरहाजिरी और निजी अस्पतालों में उनकी मोटी फीस वसूल कर ओपीडी चलाने की खबरें प्रकाशित की तो खलबली मच गई। पिछले तीन दिनों से कई सरकारी डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करते समय पकड़े जाने के भय से मरीज देखना तो दूर फोन तक नहीं रिसीव कर रहे हैं। कई डॉक्टर सरकारी आवासों के सर्वेंट क्वार्टर में मरीज देख रहे हैं।


बदली परिस्थिति में मेडिकल कॉलेज से संबंध एसआरएन और चिल्ड्रेन अस्पताल में काम कर रहे कई डॉक्टर सरकारी नौकरी को किसी भी वक्त अलविदा कह सकते हैं। यही हाल सीएचसी और पीएचसी में तैनात डॉक्टरों का है। कुछ वीआरएस लेने तो कुछ इस्तीफा देने के मूड में हैं। इन डॉक्टरों की संख्या एक दर्जन से अधिक है। एमएलएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि डॉ. एनएन गोपाल का इस्तीफा उन्हें मिल गया है। उसमें उन्होंने व्यक्तिगत कारण से नौकरी करने में असमर्थता जताई है। उनका इस्तीफा अग्रिम कार्रवाई के लिए शासन को भेज दिया गया है।
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सीएम योगी आदित्यनाथ का खौफ निजी प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों पर हावी है। प्रशासन ने कई टीमें गठित कर जांच शुरू कराई तो डॉक्टरों में खलबली मच गई। अब शासन के निर्देश पर सोमवार से मेडिकल कॉलेज और अन्य सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की हाजिरी जांची जा रही है। विभागाध्यक्षों को जिम्मेदारी दी गई है कि अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्रों से गायब डॉक्टरों की रिपोर्ट शासन को भेजी जाए। साथ ही किस डॉक्टर ने कितने मरीज देखे या ऑपरेशन किए, इसकी भी पूरी जानकारी मुख्यालय को उपलब्ध कराई जाए। इस नए आदेश की दोपहर बाद जानकारी होने पर ओपीडी से गायब डॉक्टर आननफानन में अस्पताल पहुंचे और दो बजे तक ओपीडी में बैठे रहे। एसआरएन और चिल्ड्रेन अस्पताल के साथ बेली, कॉल्विन, डफरिन अस्पताल में अपने रोस्टर के हिसाब से डॉक्टर मौजूद रहे। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह चार बजे शाम तक एसआरएन अस्पताल में ओपीडी के साथ अन्य व्यवस्थाएं देखते रहे वही अन्य अस्पतालों के  चिकित्सा अधीक्षकों ने डॉक्टरों की ओपीडी में जाकर जायजा लिया। दोपहर बाद रिपोर्ट सीएमएओ डॉ. आलोक वर्मा को दी।
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