कला, संगीत, डांस जैसे क्षेत्रों से इतर कालिंदीपुरम की श्रेया ने खेल की उस विधा में अपनी जगह जमाई है, जो रफ एंड टफ होने की वजह से पुरुषों की मानी जाती है। विष्णु भगवान पब्लिक स्कूल की 11वीं की श्रेया सिंह ने ताइक्वांडो में सफलता का परचम लहराया है। एशियन गेम्स 2014 में प्रतिभाग कर चुकी श्रेया आठ वर्षों से नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट हैं। घर में सबसे छोटी श्रेया 11 वर्षों से मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में ताइक्वांडो सीख रहीं है। श्रेया कहती हैं, पापा ने तो समाज के अराजक तत्वों का मुकाबला करने के लिए ताइक्वांडो सिखाना शुरू किया था। मगर ताइक्वांडो सीखते-सीखते अब यह पैशन बन गया।
श्रेया ने 2012 में जूनियर एशियन चैंपियनशिप में ब्रोंज पदक हासिल करने के बाद 2013 में यूथ ओलंपिक क्वालिफिकेशन और 2014 में सीनियर एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। श्रेया जिला और प्रदेश स्तरीय कई प्रतियोगिताएं भी अपने नाम कर चुकी हैं। श्रेया के कोच रंजीत यादव का कहना है कि श्रेया ने लगन से ही इतना कुछ अपने नाम कर लिया है। अधिवक्ता पिता और व्यापार मंडल से जुड़ीं मां कहती हैं, आज हर लड़की को ताइक्वांडो सीखना चाहिए क्योंकि यह सेल्फ डिफेंस के लिए बेहद जरूरी है। वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी दूसरे पर निर्भर न रहें।