ग्राम न्यायालय मेजा में सोमवार को 28 साल पुराने मुकदमे में मांडा पुलिस की भूमिका संदिग्ध पाई गई। न्यायाधिकारी संतोष कुमार वर्मा ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। मांडा पुलिस पर लगातार समन, जमानतीय व गैर जमानतीय वारंट दबाए रखने का आरोप है।
पुलिस पर न्यायालय वापसी पर भ्रामक आख्या प्रस्तुत कर अदालत को गुमराह करने का भी आरोप है। कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में थाना प्रभारी मांडा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट पुलिस आयुक्त को भेजी गई है। मामला मांडा थाने से जुड़े 28 वर्ष पुराने मुकदमे का है। पत्रावली पहले जनपद न्यायालय में थी। वर्ष 2023 में यह ग्राम न्यायालय मेजा को अंतरित हुई। पिछले एक दशक में न्यायालय ने अनगिनत समन, वारंट और एनबीडब्ल्यू जारी किए।
आरोप है कि पिछले तीन वर्षों से ग्राम न्यायालय मेजा से लगातार वारंट भेजे जा रहे थे। परंतु पुलिस अभियुक्त की उपस्थिति सुनिश्चित कराने में विफल रही। इसके बजाय पुलिस केवल तारीखें टलवाती रही। कोर्ट ने थाना मांडा से जवाब तलब किया है। उनसे पूछा गया है कि इस कृत्य के लिए उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई क्यों न की जाए।