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धर्म की जगह धर्मी परिवर्तन होना चाहिए

Sat, 31 Jan 2015 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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पूरे देश में घर वापसी को लेकर छिड़ी बहस के बीच शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जुटे विद्वानों ने विचार रखे। दर्शनशास्त्र विभाग में आयोजित कार्यशाला में अलग-अलग धर्म के प्रतिनिधियों ने जबरन धर्म परिवर्तन का खुले तौर पर विरोध किया। उन्होंने सभी धर्मों को एक बताते हुए परिवर्तन के औचित्य पर ही सवाल उठाया। विद्वानों ने धर्म परिवर्तन के बजाय धर्मी यानी, व्यक्ति के आंतरिक परिवर्तन की आवश्यकता बताई।
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बीएचयू के प्रोफेसर एसपी पांडेय ने कहा कि धर्म परिवर्तन ठीक नहीं है लेकिन व्यक्ति में परिवर्तन होना चाहिए। खालसा पंत के लाल सिंह बाजवा ने कहा कि सिख धर्म की मूल धारणा है कि सभी एक ईश्वर की संतान हैं। इसलिए धर्म परिवर्तन के लिए कोई स्थान नहीं है। उर्दू विभाग की प्रोफेसर शबनम हमीद ने कहा कि धर्म मर्यादा और अनुशासन सिखाता है। आजादी भी असीमित नहीं होनी चाहिए। उसके साथ पाबंदी भी होनी चाहिए। संस्कृत विभाग के प्रोफेसर एसडी द्विवेदी ने कहा कि यदि स्वत: हो तो धर्म परिवर्तन बुरा नहीं है।

जबरदस्ती और प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन नहीं होना चाहिए। विभाग के ही डॉ.रामसेवक दुबे ने कहा कि सभी धर्म मुख्य रूप से सनातन धर्म से निकले हैं। इसलिए धर्म परिवर्तन नहीं हो सकता, केवल पूजा पद्धति में भेद हो सकता है। जो कट्टरता की बात करते हैं वे धर्म को नहीं जानते। विद्वानों और धर्माचार्यों को आगे आकर संदेश देना होगा कि ‘हम एक हैं।’ कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर डीएन द्विवेदी ने कहा कि पहले मनुष्य आया। धर्म बहुत बाद में आया। इसलिए व्यक्ति खुद को मनुष्य समझ ले तो धर्म परिवर्तन की जरूरत नहीं रह जाती। इनसे अलग यूइंग क्रिश्चियन कालेज के प्राचार्य डॉ.एम.मैसी ने कहा कि धर्म परिवर्तन ईसाई धर्म का अनिवार्य अंग है।
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 हर व्यक्ति को धर्म परिवर्तन की स्वतंत्रता है लेकिन जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए। पाप, गंदगी से बचाने केलिए ईसाई धर्म में ज्ञान देने की अनुमति है लेकिन धर्म के ठेकेदाराें ने इसके मूल भाव को नहीं समझा। संचालन कर रहे डॉ. ऋषिकांत पांडेय ने कहा कि धर्म परिवर्तन दो प्रकार का होता है। पहला धर्म में परिवर्तन यानी व्यक्ति का आंतरिक परिवर्तन। जबकि, दूसरा होता है धर्म का परिवर्तन। इस भेद को समझना होगा। इससे पहले परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर एचएस उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रोफेसर जटाशंकर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में प्रोफेसर देवाशीष गुहा, प्रोफेसर आरके उपाध्याय, डॉ.एसके महाराणा, प्रोफेसर एसके सेठ आदि मौजूद रहे।
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