अपर शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अधिकारियों की गलती के कारण शिकायतकर्ता को ही समन जारी किया गया। इससे पहले कोर्ट ने एसएसपी आजमगढ़ को हाजिर होने का निर्देश दिया था। जिस पर यह जानकारी दी गई। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने गांव नोनीपुर उर्फ नई कोट के निवासी हरि प्रसाद यादव व दो अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मारपीट की घटना की प्राथमिकी दर्ज कराने वाले याची व दो नाबालिगों के खिलाफ ही पुलिस चार्जशीट पर एसीजेएम आजमगढ़ द्वारा जारी समन की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर एसएचओ मेहनाजपुर, सीओ व विवेचना अधिकारी को 17 जुलाई को तलब किया है। कोर्ट ने इन अधिकारियों से सफाई मांगी है कि उन्होंने अपनी ड्यूटी ठीक से क्यों नहीं की, जिसके चलते शिकायतकर्ता को तीन साल तक परेशानी झेलनी पड़ी। याचिका की सुनवाई 17 जुलाई को होगी।
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अपर शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अधिकारियों की गलती के कारण शिकायतकर्ता को ही समन जारी किया गया। इससे पहले कोर्ट ने एसएसपी आजमगढ़ को हाजिर होने का निर्देश दिया था। जिस पर यह जानकारी दी गई। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने गांव नोनीपुर उर्फ नई कोट के निवासी हरि प्रसाद यादव व दो अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
याची ने गांव के राजेंद्र, संतोष, विनोद, अनिल, सुनील के खिलाफ मारपीट गालीगलौज करने के आरोप में 28 अप्रैल 20 को एफआईआर दर्ज कराई। याची को चोटें आईं थीं। मेडिकल रिपोर्ट भी है। विवेचना अधिकारी ने 25 जून 20 को याची व दो नाबालिग बच्चों विजय व विनीत के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। न्यायिक मजिस्ट्रेट आजमगढ़ ने संज्ञान लेकर एसीजेएम को भेज दिया। जहां से याची को समन जारी कर तलब किया गया। याचिका में 12 जनवरी 21 को जारी समन रद्द करने तथा केस समाप्त करने की मांग की है। हालांकि, एजीए ने माना कि पुलिस की गलती से ऐसा हुआ है। जिस पर कोर्ट ने सफाई के साथ अधिकारियों को हाजिर होने का निर्देश दिया है।