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सांस्कृतिक केंद्र में शुरू हुआ राष्ट्रीय शिल्प मेला, दस दिन चलेगा

Mon, 02 Dec 2019 02:27 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
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demo pic - फोटो : अमर उजाला
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शिल्प और स्वाद के संगम के साथ दस दिनी राष्ट्रीय शिल्प मेला रविवार से सांस्कृतिक केंद्र में आरंभ हुआ। देश के विभिन्न अंचलों के शिल्पों से हाट सजा तो तरह-तरह के स्वाद का संगम भी सभी को आकृष्ट करता रहा। असमी कलाकारों के मांगलिक बांसुरी वादन से कार्यक्रम की शुरुआत के बाद बघेलखण्ड अंचल के रीवा की वर्तिका एवं सुषमा शुक्ला ने ‘वंदेमातरम’ के गायन के बाद बघेली लोक संस्कृति से जुड़े संस्कार गीतों के गायन से आनंदित किया।

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लोक कलाकार बीना सिंह एवं दल की ओर से पारंपरिक ढेड़िया नृत्य के बाद राजस्थान की ममता देवी एवं दल की ओर से मांगलिक अवसरों पर होने वाला चरी व चकरी नृत्य प्रस्तुत किया गया। असमी कलाकारों ने फसल की कटाई के बाद के उल्लास को दर्शाने वाले बिहू नृत्य की बहुरंगी छवियों से जोड़ा।

उड़ीसा के लोक कलाकारों की ओर से मंदिरों में देवताओं की प्रति किए जाने वाले पारंपरिक गोटीपुआ नृत्य, मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में शिव-पार्वती को समर्पित ‘गणगौर लोकनृत्य’, मणिपुर के लोक कलाकारों की ओर से युद्धकला पर आधारित लोकनृत्य, ढोल पर आधारित पुंगचोलम तथा स्टिक डांस की प्रस्तुति सम्मोहित करती रही। अतिथियों की ओर से कार्यक्रम के औपचारिक उद्घाटन के बाद लोक कलाकारों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ सभी का स्वागत किया।
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बतौर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने हस्तशिल्प और लोक संस्कृति के संगम की सराहना की। कहा, इलाहाबाद हाट में सांस्कृतिक विविधता का ऐसा संगम है कि मानो पूरा देश सिमट आया है। ब्रिगेडियर वीके शर्मा ने कहा कि यहां आकर सम्पूर्ण भारत की सांस्कृतिक विरासत को एक साथ, एक जगह देखने का मौका मिला है। विशिष्ट अतिथि सांसद जनार्दन मिश्र ने कहा कि लोक संस्कृति हमारी पहचान है और यही ‘लोक’ देश की एकता को मजबूती प्रदान करता है। कलाकार-शिल्पकार देश की सांस्कृतिक विरासत के सच्चे प्रहरी हैं। आरंभ में केन्द्र निदेशक इन्द्रजीत ग्रोवर ने अतिथियों, शिल्पकारों और कलाकारों का स्वागत करते हुए राष्ट्रीय शिल्प मेले के बारे में जानकारी दी। संचालन योगेंद्र मिश्र ने किया।

मुक्ताकाशी मंच पर आज
शिल्प मेले की दूसरी शाम के तहत सोमवार को मुक्ताकाशी मंच पर मध्य प्रदेश की भजन गायिका शहनाज़ अख्तर का भजन, मणिपुर, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा के लोकनृत्य एवं दिल्ली की पियाली घोष के ओडिसी नृत्य की प्रस्तुतियां शाम 5.30 से होंगी।

मेले में खास-खास
राष्ट्रीय शिल्प मेले में कर्नाटक का सिल्क सूट एवं अन्य उत्पाद, हैंड इम्ब्रायडरी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार के सिल्क वस्त्र, साड़ियां, कश्मीर, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल के ऊनी वस्त्र, शाल जयपुरी रजाई, विविध प्रान्तों की हैंड इम्ब्रायडरी, स्टोन ज्वेलरी, विविध प्रांतों की साड़ियां, हैदराबाद का मोती, बंगाल की धान ज्वेलरी, चटाई, ड्राई फ्लावर, विविध प्रांतों के चर्मशिल्प राजस्थान का स्टोन कार्विंग, मोजाइक ग्लास टेराकोटा बर्तन, पंजाब की फुलकारी, जूती ड्राई फ्लावर, उत्तर प्रदेश की पीतल मूर्ति, भगवान के पोशाक, लकड़ी के खिलौने, चादरें, विविध प्रांतों का मृत्तिका शिल्प आदि इस राष्ट्रीय शिल्प मेले का आकर्षण होंगे। अबकी बार मेले में अलग से फूड जोन बनाया गया है।

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