मंडलायुक्त लोकेश एम ने शुक्रवार को परिषदीय विद्यालयों की समीक्षा बैठक की। बैठक में बच्चों की सुरक्षित आवाजाही, मूलभूत सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता पर चर्चा हुई। उन्होंने बीएसए, बीईओ और एबीएसए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
समीक्षा में सामने आया कि 166 विद्यालयों में बच्चों को मुख्य सड़क पार कर स्कूल जाना पड़ता है। मंडलायुक्त ने शिक्षामित्रों को बच्चों को गांव से स्कूल तक सुरक्षित लाने और छुट्टी के बाद वापस पहुंचाने की जिम्मेदारी दी। जनपद के 24 विकासखंडों में कुल 2832 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें से 31 विद्यालयों में पहुंच मार्ग नहीं है। 11 विद्यालयों में गड्ढों के कारण जलभराव की समस्या है। 152 विद्यालयों में बिजली कनेक्शन या विद्युत व्यवस्था में दिक्कतें हैं। मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को इनके समाधान के लिए पत्र भेजा। उन्होंने प्राथमिकता से कार्रवाई के निर्देश दिए। 44 विद्यालयों के पास से हाईटेंशन तार हटाए जाने पर संतोष व्यक्त किया गया।
184 स्कूलों में दिव्यांग शौचालय नहीं
184 विद्यालयों में दिव्यांग शौचालय नहीं पाए गए। मंडलायुक्त ने आवश्यकतानुसार रैंप, हैंडरेल और अलग शौचालय बनवाने के निर्देश दिए। विद्यालयों में सफाई व्यवस्था असंतोषजनक मिली। सफाईकर्मियों के नियमित काम न करने पर नाराजगी जताई गई। ग्राम पंचायत और नगर निगम क्षेत्रों के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई। लापरवाही पर प्रतिकूल प्रविष्टि और वेतन रोकने के निर्देश दिए गए।
बच्चों को किया जाएगा सम्मानित
बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए मंडलायुक्त ने निर्देश दिए। विद्यालय प्रबंधन समितियों, ग्राम प्रधानों और अभिभावकों के साथ दोबारा बैठकें होंगी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्टार परफॉर्मर्स बनाकर सम्मानित किया जाएगा। उनके नाम नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित होंगे और मेडल व बैज दिए जाएंगे। शारदा अभियान के तहत आउट ऑफ स्कूल बच्चों को विद्यालय से जोड़ने और सड़क किनारे भीख मांगने वाले बच्चों को एनजीओ के सहयोग से शिक्षा से जोड़ने के निर्देश भी दिए गए।