शक्तिपीठ श्री अलोपशंकरी मंदिर, प्रयागराज।
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शारदीय नवरात्र में गज पर सवार होकर आईं मां जगदंबा की उपासना सोमवार को कलश स्थापना के साथ शुरू हो गई। इस बार नवरात्र चतुर्थी तिथि की वृद्धि की वजह से दस दिन का होगा। विधि विधान के साथ घरों और मंदिरों में कलश की स्थापना कर महाशक्ति की आराधना की गई। देवी मंदिरों को विद्युत झालरों और सुगंधित फूलों से सजाया गया है। कलश कलश स्थापित कर चुनरी, मेवा, मखाना, सिंदूर, चूड़ी, माला-फूल, फल, पंचमेवा, दही आदि अर्पित किया गया। देसी घी के अखंड दीप जलाकर मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की गई।
श्री ललिता देवी, श्री कल्याणी देवी और श्री माता अलोपशंकरी मंदिर में मंगला आरती में हजारों की संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया। मंदिरों में भोर से ही भक्तों की लंबी कतार लगी रही। जयकारों से पूरा वातावरण देवी मय हो गया। बड़ी संख्या में भक्त आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी देवी और मैहर शारदा माता का दर्शन करने के लिए रवाना हुए। मंदिरों और घरों में देवी चालीसा, देवी सूक्त, श्री दुर्गा सप्तशती, सुंदरकांड और रामायण आदि का पाठ किया गया।
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा यानी 22 सितंबर को कलश स्थापना का मुख्य मुहूर्त सूर्योदय से 9:49 बजे तक रहेगा। इस बार अभिजित मुहूर्त दिन में 11:26 से 12:14 बजे तक है। सोमवार को प्रतिपदा तिथि पर उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र दिन में 11:20 बजे तक है। इसके बाद हस्त नक्षत्र का संचरण होगा। शुक्ल नामक योग रात्रि 8:57 तक रहेगा, उसके बाद ब्रह्म योगा लगेगा। सर्वार्थसिद्धि योग का भी शुभ संयोग है। इस बार माता का आगमन गज यानि हाथी पर हुआ है, जिसका फल अधिक वर्षा और माता का गमन मानव के कंधे पर हो रहा है, जिसका फल अत्यंत लाभकारी व सुखदायक माना जाता है। इस बार माता का आगमन और गमन दोनों ही अति शुभकारी है। इसके साथ ही आश्विन शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि की वृद्धि से 16 दिनों का होगा जिससे यह पक्ष भी साधकों के लिए सुख-समृद्धि और शांति देने वाला होगा।