शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पत्रकारों से बातचीत करते हुए।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आगे भी उसी स्थान पर बैठे रहेंगे और आवश्यकता पड़ी तो अगले वर्ष भी इसी तरह विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगले वर्ष उन्हें मनाने के लिए मुख्यमंत्री स्वयं भी आ सकते हैं, हालांकि यह जरूरी नहीं है कि योगी आदित्यनाथ ही हों, कोई अन्य मुख्यमंत्री भी हो सकता है।
हाईकोर्ट में दाखिल करेंगे याचिका
शंकराचार्य स्वमी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि मठ से जुड़े लोगों ने इस पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि माघ मेले में संगम स्नान के लिए चारों शंकराचार्यों के लिए प्रोटोकॉल बनना चाहिए ताकि शंकराचार्य पालकी पर जाकर स्नान कर सकें।
शंकराचार्य का दावा
- 35 लोगों को हिरासत में ले लेकर उनकी पिटाई की गई, इसमें 12 का मेडिकल हुआ। महिला श्रद्धालु , बुजुर्ग व कम उम्र के साधु- संतों को पीटा गया
- घटना के बाद रात एक बजे तक अमावस्या लगी थी। प्रशासन को समाधान का अवसर दिया था लेकिन कोई पहल नहीं की गई
- सादे वेश में पुलिसकर्मी पालकी धकेलते हुए शिविर के बाहर छोड़ गए
अधिकारियों ने दी सफाई, कहा- किसी को नहीं रोका स्नान से
शंकराचार्य के आरोपों के बाद मेला प्रशासन ने भी सफाई दी। मेला कार्यालय में बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने कहा कि किसी को भी संगम स्नान से नहीं रोका गया है। भीड़ के मद्देनजर अविमुक्तेश्वरानंद से कुछ देर रुकने के लिए कहा गया था। पुलिस ने किसी के साथ अभद्रता नहीं की। उनके आरोप निराधार हैं। डीएम मनीष कुमार वर्मा और मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उनको पीठाधीश्वर नहीं माना गया है। उनका जो शिविर है वह बद्रिकाश्रम के नाम पर आवंटित है। पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने किसी साधु संत के साथ मारपीट नहीं की है। जांच में बात सामने आई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।