मस्जिद कमेटी के वकील एसएफए नकवी ने एएसआई की रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए। कहा, एएसआई ने उन स्थानों का सर्वे ही नहीं किया, जहां रंगाई-पुताई और सजावट की सख्त जरूरत है। इस पर कोर्ट ने एएसआई को पुनः जांच करके 24 घंटे में रिपोर्ट देने को कहा। एएसआई से हलफनामे में यह भी स्पष्ट बताने को कहा कि आपत्तियों में जिन स्थानों का जिक्र है, वहां रंगाई-पुताई की जरूरत है या नहीं।
बुधवार को हलफनामे संग पेश एएसआई के अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि मस्जिद प्रबंधन समिति वर्षों से रंगाई-पुताई कराती आ रही थी, जिससे मस्जिद की बाहरी दीवारों को नुकसान पहुंचा है। लिहाजा, पुरातत्व वैज्ञानिकों की राय के बिना कोई कदम नहीं उठा सकते। मस्जिद का सर्वे बुधवार को (आज) वैज्ञानिकों की टीम करेगी।
सवाल...पुताई का जिम्मा एएसआई का तो कैसे कराती रही मस्जिद कमेटी
एएसआई की दलील से हैरान कोर्ट ने पूछा कि जब मस्जिद के रखरखाव व सजाने-संवारने की जिम्मेदारी एएसआई की थी तो मस्जिद कमेटी यह काम कैसे कर रही थी। आज रंगाई-पुताई पर आपत्ति उठाई वाली एएसआई अभी तक सो रही थी क्या? या अब सरकार के डर व इशारे पर इससे भाग रही है? अधिकारी खुद को बचा रहे हैं कि कल हुकूमत बदली तो वे सुरक्षित रहें?
समझौता तोड़ने का हिंदू पक्ष ने लगाया आरोप
हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने कहा कि मस्जिद कमेटी ने 1927 के समझौते को तोड़ा है। लिहाजा, मस्जिद कमेटी की मांग नाजायज है। इस पर भी कोर्ट ने तल्ख अंदाज में कहा कि यहां हवा में बहस नहीं होती। अगर मस्जिद कमेटी ने समझौते की शर्तों को तोड़ा होता तो एएसआई और सरकार ने नोटिस दिया होता। कोर्ट के पूछने पर महाधिवक्ता अजय मिश्रा व एएसआई के वकील मनोज कुमार सिंह ने बताया कि कमेटी ने समझौते की शर्तों को कभी नहीं तोड़ा है। एएसआई व हिंदू पक्ष की दलीलों से असंतुष्ट कोर्ट ने जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई और सजावटी लाइट लगाने की मांग को मंजूरी दे दी। कहा, मस्जिद के राष्ट्रीय धरोहर होने के नाते रंगाई-पुताई एएसआई की ही जिम्मेदारी है।