शीलभंग और लैंगिक उत्पीड़न दुष्कर्म नहीं
आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए विशेष अदालत ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धाराओं के साथ दुष्कर्म का आरोप भी तय किया था। इसके खिलाफ आरोपी ने आपत्ति दाखिल की, जिसे अदालत ने निरस्त कर दिया था। तब आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याची के अधिवक्ता सुरेश कुमार मौर्य ने कहा कि पीड़िता की मां ने अपने बयानों में कहीं भी यौन संबंध बनाए जाने की पुष्टि नहीं की है। चिकित्सीय परीक्षण के दौरान पीड़िता भी आंतरिक जांच की इजाजत नहीं दी गई। लिहाजा, दुष्कर्म का अपराध गठित नहीं होता। कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए आरोपी को राहत दे दी।