इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) भर्ती-2025 की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर दायर विशेष अपील खारिज कर दी। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर परिणाम में हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं बनता। मुख्य परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 28 से 30 जून 2026 के बीच होगी।
यह अपील पंकज वर्मा समेत तीन अभ्यर्थियों ने दायर की थी। उनका आरोप था कि एपीओ प्रारंभिक परीक्षा परिणाम में आरक्षित वर्ग के उन मेधावियों को अनारक्षित श्रेणी में समायोजित नहीं किया गया, जिन्होंने सामान्य वर्ग की कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए थे। उन्होंने उप्र आरक्षण अधिनियम-1994 की धारा 3(6) का हवाला देते हुए परिणाम पुनः घोषित करने की मांग की थी।
इससे पहले एकल पीठ ने 18 जून 2026 को प्रतिवादियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था। अंतरिम राहत नहीं देने पर विशेष अपील दाखिल की गई थी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि मुख्य परीक्षा 28 से 30 जून के बीच प्रस्तावित है। तत्काल राहत नहीं मिली तो वे मुख्य परीक्षा में शामिल होने का अवसर खो देंगे और उनकी याचिका निरर्थक हो जाएगी।
आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि आरक्षण अधिनियम की धारा 3(6) का लाभ अंतिम चयन के चरण में लागू होता है, प्रारंभिक परीक्षा में नहीं। साथ ही मुख्य परीक्षा के लिए चयनित अभ्यर्थियों को पक्षकार बनाए बिना परिणाम में बदलाव संभव नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि एकल पीठ का आदेश केवल प्रक्रियागत है। उसमें किसी अधिकार का अंतिम निर्धारण नहीं किया गया है। याची यह भी साबित नहीं कर सके कि उनकी व्याख्या स्वीकार होने पर भी वे निश्चित रूप से मुख्य परीक्षा के लिए पात्र हो जाते। इसी आधार पर अपूरणीय क्षति का दावा भी अस्वीकार कर दिया गया।