उत्तर मध्य रेलवे जोन में यमुना, चंबल, केन, बेतवा, टोंस आदि नदी पर बने तकरीबन दस पुल ऐसे हैं, जो सौ वर्ष या उससे ज्यादा पुराने हैं। हालांकि, एनसीआर के तमाम पुलों पर सेंसर लगे हैं। पुलों पर लगे सेंसर की जांच होने के बाद रेलवे ने अब ऑनलाइन मॉनिटरिंग शुरू कर दी है।
आने वाले दिनों में संभावित बाढ़ के दौरान रेलवे के पुलों से ट्रेनों का संचालन सुचारू रूप से हो, इसके लिए उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन ने ऑनलाइन मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। इन पुलों पर सेंसर लगाए गए हैं, ताकि किसी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ता है तो अफसरों तक इसकी सूचना पहुंच जाए। नैनी स्थित यमुना ब्रिज समेत जोन के 20 बड़े ऐसे पुल चिह्नित किए गए हैं, जहां जलस्तर बढ़ने के बाद ट्रेनों को कॉशन पर चलाया जा सकता है।
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उत्तर मध्य रेलवे जोन में यमुना, चंबल, केन, बेतवा, टोंस आदि नदी पर बने तकरीबन दस पुल ऐसे हैं, जो सौ वर्ष या उससे ज्यादा पुराने हैं। हालांकि, एनसीआर के तमाम पुलों पर सेंसर लगे हैं। पुलों पर लगे सेंसर की जांच होने के बाद रेलवे ने अब ऑनलाइन मॉनिटरिंग शुरू कर दी है।
इसमें जीपीएस समेत तमाम नई तकनीक भी जोड़ी गई है। जलस्तर बढ़ने पर पुल पर कॉशन लगाए जाने के अगर जरूरत पड़े तो ट्रेन को भी डायवर्ट किया जा सके। एनसीआर के सीपीआरओ हिमांशु शेखर उपाध्याय का कहना है कि नई तकनीकी से कुछ ही सेकेंड में जलस्तर संबंधी अपडेट कंट्रोल रूम तक पहुंच जाता है।