इलाहाबाद (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड बीते चार वर्ष से लगातार विवादों में बना है। विवादों के बीच अब तो कोर्ट की सक्रियता के कारण चयन बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति रद्द करने के साथ तीन सदस्यों के काम पर रोक लगा दी गई है। चयन बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों की योग्यता पर सवाल उठाए जाने के बाद तो कोर्ट ने प्रधानाचार्य के इंटरव्यू के रिजल्ट की घोषणा पर रोक लगा दी है। सूत्रों का कहना है कि विवादों से बचने के लिए अब सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को भंग करके इसका नाम उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग करके अध्यक्ष एवं सदस्यों की योग्यता का मानक बदलने की तैयारी हो रही है।
प्रदेश में नई सरकार के गठन के साथ प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में टीजीटी-पीजीटी शिक्षकों के चयन के लिए शिक्षक आयोग का नए सिरे से गठन किया जाता है। पूर्व में बसपा सरकार ने चयन बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों के कार्यकाल को छह वर्ष से कम करके दो वर्ष कर दिया था। इस कारण से पूर्ववर्ती सरकार की ओर से नियुक्त सदस्य एवं अध्यक्षों को अपना कार्यकाल समय से पहले पूरा करके जाना पड़ा।
2012 में प्रदेश में सपा सरकार के गठन के बाद अध्यक्ष को हटाने के बाद सरकार ने चयन बोर्ड के मानक में कोई बदलाव नहीं किया। अब अभ्यर्थियों एवं कोर्ट की ओर से अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति एवं योग्यता के मानक को लेकर लगातार सवाल उठाने के बाद सरकार की ओर से चयन बोर्ड भंगकर इसके नए सिरे से गठन की तैयारी चल रही है। इसमें अध्यक्ष एवं सदस्य की योग्यता के मानक में लचीला पन अपनाए जाने की संभावना है। इसके लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग नाम दिया जा सकता है।