मऊआइमा की रहने वाली सीमा मिश्रा ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादे से कम संसाधन भी बड़ी राह बना देते हैं। कभी सीमित साधनों में अपने सपनों को संजोने वाली सीमा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बनी हैं बल्कि 40 से अधिक महिलाओं को भी हुनरमंद बनाकर उनके जीवन में नई रोशनी भर रही हैं। सीमा ने छोटे स्तर पर ब्यूटी पार्लर की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे उनका काम आगे बढ़ता गया और उनका पार्लर, प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी पहचान बना चुका है।
सीमा बताती हैं कि रोजाना दो बैच संचालित होते हैं, जिनमें महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। छह महीने तक सिलाई-कढ़ाई और अगले छह महीने ब्यूटी पार्लर का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस कोर्स को पूरा करने पर महिलाओं को जन शिक्षण संस्थान से प्रमाणपत्र मिलता है, जिससे उनके लिए रोजगार के नए रास्ते खुलते हैं।
सीमा का कहना है कि एक बैच से उन्हें प्रति माह लगभग आठ हजार रुपये की आय हो जाती है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। उनके इस सफर में उनके पति संतोष कुमार मिश्रा का सहयोग अहम है। सीमा ने बताया कि जिन महिलाओं ने कभी घर की चौखट से बाहर कदम नहीं रखी थीं। अब हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रही हैं।