मीरापुर के तिवारी परिवार पर कोरोना का ही नहीं अपनों के न रहने का भारी दुख पड़ा। आंनद तिवारी के कोरोना के लक्षण उनकी मां शकुंतला देवी पर भारी पड़े। बेटे की बिगड़ी तबीयत को देख खानापीना छोड़ चुकीं बुजुर्ग मां शकुंतला ने 25 अप्रैल को अंतिम सांस ली। घर में बेटी को संक्रमण से बचाने और पति की सेवा कर कोरोना मुक्त कराने के करीब 35 दिनों के दौरान प्राची तिवारी ने हौसला नहीं खोया। कभी मां, कभी पत्नी तो कभी डॉक्टर बनकर हिम्मत से परिस्थितियों को मुकाबला किया। इस बीच सास के क्रियाकर्म, तेरहवीं संपन्न कराई और पति को मौत के मुंह से खींच लाईं।
आनंद तिवारी पेशे से अधिवक्ता हैं, उनकी पत्नी सजग गृहणी। पांच अप्रैल को आनंद ने हल्का बुखार महसूर किया तो खुद को आइसोलेट कर लिया। 13 अप्रैल तक तीन बार आरटीपीसीआर जांच कराई पर हर बार रिपोर्ट निगेटिव आई। 13 अप्रैल की रात उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई तो अल्लापुर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती हुए। वहां हुई ट्रूनॉट जांच में उन्हें कोविड पॉजिटिव बताया गया और अस्पताल प्रबंधन ने कोविड अस्पताल जाने का कहा। विषम परिस्थिति थी, किसी अस्पताल में जगह नहीं थी, आनंद की हालत गंभीर थी।
प्राची ने हिम्मत नहीं हारी। पति को घर लाईं और एहतियात बरतते हुए डॉ. आशुतोष गुप्ता की सलाह पर इलाज शुरू किया। इस बीच आनंद की मां शकुंतला देवी की मौत ने उन्हें विचलित किया पर उन्होंने खुद को संभाला। विषम परिस्थितियों में पति की सेवा कर उन्हें इस काबिल किया कि 23 अप्रैल को उनका ऑक्सीजन सपोर्ट हटाया गया। डॉक्टर के परामर्श से दवाएं ही नहीं ताजा पौष्टिक भोजन और मानसिक तनाव मुक्ति के साधनों के अपनाकर प्राची ने कोरोना संक्रमित पति आनंद को पूर्व की स्थिति में लाने में सफलता प्राप्त की। प्राची कहती हैं कि कोरोना से वह डरी नहीं, डटकर मुकाबला किया। तनाव दिमाग पर हावी नहीं दिया। उन्होंने बताया कि वह अपनों की शुभकामनाएं और डॉक्टर आशुतोष के परामर्श से कोरोना को मात दे पाई हैं।