इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नए कुलपति की नियुक्ति का इंतजार अब खत्म होने को है। सर्च कमेटी गठित कर दी गई है। विजिटर (राष्ट्रपति) नॉमनी न्यायमूर्ति सखाराम यादव होंगे। दो अन्य सदस्य न्यायमूर्ति आरएस धवन और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कुलपति प्रो. एसके सोपोरी हैं। खास यह कि नोटिफिकेशन विश्वविद्यालय की ओर से ही निकाला जाएगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का इस बाबत पत्र विश्वविद्यालय को मिला है। नोटिफिकेशन के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। इसी सप्ताह विज्ञापन की उम्मीद है। सबकुछ सामान्य रहा तो डेढ़ से दो महीने में नए कुलपति की नियुक्ति हो जाएगी।
इविवि के पूर्व कुलपति प्रो. अनिल कुमार सिंह ने 28 जुलाई को ही इस्तीफा दे दिया था। उनकी जगह वरिष्ठतम प्रो. एनआर फारूकी कार्यभार देख रहे हैं लेकिन तभी से नए कुलपति का इंतजार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में कुलपति के अलावा रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी भी कार्यवाहक हैं। इसलिए विश्वविद्यालय में सबकुछ ठप हो गया है। ऐसे में नए कुलपति की नियुक्ति के लिए अधिक बेसब्री है। इसके मद्देनजर सर्च कमेटी के लिए विश्वविद्यालय कार्य समिति की ओर से नामित न्यायमूर्ति आरएस धवन और प्रो. एसके सोपोरी का नाम मंत्रालय को काफी पहले भेज दिया गया था, लेकिन विजिटर नॉमनी के चुनाव में छह महीने से भी अधिक वक्त लग गया। इससे नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई। हालांकि, न्यायमूर्ति सखाराम यादव को सर्च कमेटी का कोआर्डिनेटर बनाए जाने तथा मंत्रालय का पत्र मिलने के बाद नए कुलपति की जल्द नियुक्ति की उम्मीद बनी है।
अब कुलपति के चयन के लिए नोटिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। अन्य विश्वविद्यालयों में कुलपति के लिए अब तक मंत्रालय की ओर से ही विज्ञापन निकाला जाता रहा है। आवेदन भी मंत्रालय में करना होता था लेकिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मामले में प्रक्रिया में थोड़ा बदलाव हुआ है। मंत्रालय ने विश्वविद्यालय को ही विज्ञापन निकालने के लिए कहा है। दावेदारों को आवेदन भी विश्वविद्यालय में करना होगा। इसके बाद सभी प्रपत्र सर्च कमेटी को भेज दिए जाएंगे। सर्च कमेटी इन आवेदन या इसके बाहर से तीन नाम चयनित करके राष्ट्रपति को भेजेगी। उनमें से किसी एक की नियुक्ति का प्रावधान है।