झूंसी रेलवे स्टेशन के निकट सड़क किनारे रेलवे की करीब 50 करोड़ रुपये की 40 बीघा जमीन को बिल्डर ने एसडीएम के साथ मिलकर राजस्व अभिलेखों में अपने नाम दर्ज करा ली। उसी के बाद इस जमीन की प्लाटिंग करके बेच दिया गया। अभी भी काफी जमीन बिकने से बची हुई है। रेलवे की यह जमीन एडीए की त्रिवेणीपुरम कालोनी के निकट है। तीन महीने से चल रही इस मामले की गोपनीय जांच पूरी होने के बाद तत्कालीन एसडीएम फूलपुर राज कुमार द्विवेदी, तहसीलदार सहित कई कर्मचारियों को दोषी माना गया है। कमिश्नर अशीष गोयल ने राजकुमार द्विवेदी सहित सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिख दिया है। साथ ही संबंधित एसडीएम, बिल्डर तथा अन्य दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश सीआरओ को दिए हैं।
चंदोहा के कुतुबुद्दीन सहित तीन लोगों ने दो साल पहले एसडीएम के यहां आवेदन किया कि कटका गांव में 40 बीघा जमीन की खतौनी में लिपकीय त्रुटि के कारण दूसरे का नाम दर्ज हो गया है। इस जमीन के वास्तविक मालिक वह हैं। उन्होंने एसडीएम से राजस्व अधिनियम की धारा 33/39 के तहत संशोधन कराने के साथ साथ मालिकाना हक दिलाने का अनुरोध किया था। तत्कालीन एसडीएम ने लेखपाल, नायब तहसीलदार और तहसीलदार की रिपोर्ट लेकर यह जमीन आवेदकों के नाम दर्ज करा दी। उसी के बाद बिल्डर ने इस जमीन के प्लाटिंग प्लाट काटने शुरू कर दिए।
रेलवे के अधिकारियों को यह जानकारी हुई तो उन्होंने डीएम तथा अन्य अधिकारियों से शिकायत की। उन्होंने कहा कि तहसील स्टाफ ने तथ्यों को छिपाकर रेलवे की जमीन दूसरे के नाम कर दी है, जिस पर रोक लगाई जाए। दो साल तक इस प्रक रण की जांच ठंडे बस्ते में पड़ी रही। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही रेलवे तथा आसपास के गांव के लोगों ने शासन और कमिश्नर के यहां शिकायत की। जिसके आधार पर कमिश्नर ने यह जांच मुख्य राजस्व अधिकारी और चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी को सौंप दी। करीब दो महीने की जांच में इन अधिकारियों ने खुलासा किया है कि इस जमीन को गलत तरीके से कुतुबुद्दीन के नाम दर्ज करा दिया गया है। इसके लिए राजस्व विभाग के अधिकारी भी दोषी हैं।
तहसीलदार फूलपुर ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर 40 बीघा जमीन राजस्व अभिलेखों में फिर से रेलवे के नाम दर्ज करा दी गई है। इस जमीन पर प्राइवेट बिल्डरों ने प्लाटिंग कर दी थी। काफी प्लाट बेचे जा चुके हैं। अभी भी काफी संख्या में प्लाट रजिस्ट्री होने से रह गए हैं। इन प्लाटों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने के आदेश सब रजिस्ट्रार को दिए हैं। जिसमें जांच रिपोर्ट और कमिश्नर के आदेशों का शामिल किया गया है।
बिल्डरों ने लेखपाल तथा अन्य स्टाफ से मिलकर खसरा खतौनी के मूल अभिलेखों में छेड़छाड़ की। यह जमीन रेलवे स्टेशन झूंसी के नाम दर्ज थी लेकिन साजिश रचकर अभिलेखों में से रेलवे का नाम हटा दिया गया। आसपास के कुछ ग्रामीणों के नाम उसे दर्ज करा दिया गया। बाद में कुतुबुद्दीन सहित तीन लोगों के नाम से एक और आवेदन एसडीएम को दिया गया। जिसमें कहा कि जमीन के मालिक वह हैं, राजस्व अभिलेखों में गलत नाम दर्ज हो गया। सही नाम कराने की प्रक्रिया में दूसरे पक्ष की ओर से कोई आपत्ति नहीं की गई। यानी कि साजिश के तहत असली मालिक रेलवे को पूरी तरह से गुम कर दिया गया।
कमिश्नर के आदेश पर जिलाधिकारी संजय कुमार ने नायब तहसीलदार और तहसीलदार के खिलाफ निलंबन तथा अन्य दंडात्मक कार्रवाई के लिए राजस्व परिषद को लिख दिया गया है। एसडीएम के खिलाफ कार्रवाई के लिए कमिश्नर की ओर से शासन के नियुुक्ति विभाग को पत्र लिखा जा चुका है। दूसरी ओर एसडीएम ने लेखपाल को निलंबित कर दिया है। राजस्व परिषद को लिखे पत्र में डीएम की ओर से कहा गया है कि इन्होंने साजिश के तहत रेलवे की सरकारी जमीन को खुदबुर्द किया है। यह आपराधिक कृत्य है, इसलिए इनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। इसी तरह का पत्र कमिश्नर ने एसडीएम के खिलाफ नियुक्ति विभाग को लिखा है।
कुतुबुद्दीन ने जमीन की प्लाटिंग कर कई लोगों को बेची है। इनकी रजिस्ट्री भी हो चुकी है। अब प्रशासन इन रजिस्ट्री को अवैध घोषित करने की कार्रवाई शुरू करने जा रहा है। जल्द ही डीएम के स्तर से इसकी प्रक्रिया शुरू होगी।
‘सीआरओ से कराई गई जांच में बड़े स्तर पर गोलमाल का खुलासा हुआ है। उसी के आधार पर लेखपाल से लेकर एसडीएम तक के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इनके खिलाफ शासन को भी लिख दिया गया है। एफआईआर दर्ज कराने के आदेश भी दिए जा चुके हैं।’- आशीष गोयल, कमिश्नर