क्षेत्र में अधिकांश जगहों पर धान की रोपाई हो चुकी है। खेतों में खाद डालने का वक्त है लेकिन समितियों में उर्वरक की उपलब्धता सीमित होने की वजह से किसानों को परेशान होना पड़ रहा है।
समितियों में सुबह से कतार लगाने के बाद भी कई किसानों को खाद लिए बगैर ही घर लौटना पड़ रहा है। जिन समितियों में खाद है, वहां भीड़ अधिक होने की वजह से मारामारी की स्थिति उत्पन्न हो जा रही है। वहीं, निजी दुकानों पर खाद की कालाबाजारी से किसान चिंतित हैं। निर्धारित मूल्य से अधिक में किसानों को खाद खरीदनी पड़ रही है।
शनिवार को कौड़िहार सहकारी समिति में करीब 300 किसान खाद लेने पहुंचे थे। करीब 150 किसानों को दो-दो बोरी खाद दी गई। शेष को खाली हाथ लौटना पड़ा। स्थानीय किसान भोला सिंह यादव, श्याम लाल पटेल, संत बहादुर और ओम प्रकाश ने बताया कि आधार कार्ड पर महज दो बोरी खाद दी जा रही है। जो जरूरत से कही कम है। सही समय पर फसलों में खाद नहीं पड़ी तो पैदावार पर असर होगा।
जिला कृषि अधिकारी के खरीफ सीजन के लिए जारी निर्देशों के अनुसार, उर्वरकों का वितरण फार्मर रजिस्ट्री या खतौनी में अंकित जोत के आधार पर किया जाना है। इसके बावजूद समितियों में प्रति आधार कार्ड दो बोरी खाद दी जा रही है। किसानों ने मांग की है कि आदेशानुसार खतौनी के आधार पर पर्याप्त खाद वितरण हो।