प्रयागराज। मंसूराबाद स्थित एक डिग्री कालेज में फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति वितरण का मामला पकड़ा गया है। कालेज प्रबंधन ने सैकड़ों छात्र-छात्राओं के नाम पर छात्रवृत्ति ले ली, लेकिन जांच में मौके पर विद्यार्थी नहीं मिले। जबकि, छात्रवृत्ति के लिए 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है। अब कालेज को काली सूची में डालने के लिए शासन से सिफारिश की गई है।
कालेज में 800 से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी गई, लेकिन शिकायत के बाद पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से कराई जांच में 150 से भी कम छात्र-छात्रा मिले। इसके बाद डीएम के आदेश पर डीडीओ की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई गई। इसमें पिछड़ा वर्ग के अलावा समाज तथा अल्पसंख्यक वर्ग कल्याण विभाग के अफसर शामिल रहे। इनकी जांच में भी डेढ़ सौ से कम विद्यार्थी मिले। कालेज प्रबंधन कोई दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं करा सका। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकार शिव प्रकाश तिवारी ने बताया कि कालेज को काली सूची में डालने के लिए शासन को लिखा गया है। अब शासन को तय करना है कि कालेज को छात्रवृत्ति के लिए कितने वर्ष के लिए डिबार किया जाए। इसके अलावा अन्य कार्रवाई भी की जाएगी।
उधर, इस तरह की शिकायतें कई अन्य संस्थानों में भी मिली हैं। इसके मद्देनजर खासतौर पर, व्यवसायिक पाठ्यक्रम वाले संस्थानाें पर विशेष नजर रखने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत बीएड, डीएलएड, पॉलीटेक्निक, आईटीआई में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति की नियमित जांच की जाएगी। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी इंद्रसेन सरोज ने बताया कि छात्रवृत्ति के लिए 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है। टीम बनाकर उपस्थिति के अलावा छात्र-छात्राओं की वास्तविक संख्या की जांच की जाएगी। यह प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और पूरे वर्ष चलेगी।