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एससी, एसटी के मामले में भी हो सकती है अग्रिम जमानत की अर्जी

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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एससी, एसटी एक्ट के मामलों में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल करने का फैसला सुनाया है। जस्टिस बीके नारायण की कोर्ट ने संजय कुमार बिंद उर्फ संजय एंड तीन अन्य बनाम यूपी सरकार के मामले की सुनवाई के क्रम में कहा है कि अग्रिम जमानत के लिए एससी, एसटी की संशोधित धारा 18 बाधा नहीं बनेगी।
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अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि एससी, एसटी के मामलों में भी अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल करने को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 में बराबर का अधिकार है। कोई भी आरोपी, जिस पर एससी-एसटी एक्ट लगा है, वह अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल करने का अधिकारी है। भदोही जिले के कपूरचंद पासी ने संजय कुमार बिंद उर्फ संजय सहित चार अन्य के खिलाफ 30 अक्तूबर 2019 को मारपीट, गालीगलौच तथा एससी, एसटी एक्ट में एफआईआर दर्ज कराई थी। विरोधी पक्ष संजय कुमार बिंद उर्फ संजय ने मामले में अर्जी दाखिल कर अग्रिम जमानत की मांग की।
अर्जी पर याची पक्ष की ओर से अधिवक्ता कल्पनाथ बिंद व विवेकानंद ने बहस करते हुए सुप्रीम कोर्ट के एक अक्तूबर 2019 के आदेश का हवाला दिया। सरकार की ओर से एजीए मंजू ठाकुर ने अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध किया। कहा कि विशेष अधिनियम होने की वजह से अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।
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