अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 20 साल पहले जलाई गई थी अखंड ज्योति
स्वामी रामदास जी महाराज बताते हैं कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए यह ज्योति आज से तकरीबन 20 साल पहले यहां जलाई गई थी। इसके साथ ही यह स्थान इसलिए भी खास हो जाता है, क्योंकि यहां देवरहा बाबा बैठकर साधना करने के साथ ही श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी देते थे। यहीं से उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का समर्थन भी किया था। महंत रामदास जी महाराज बताते हैं कि अखंड ज्योति की लौ कभी कम नहीं होने दी जाती है। इस वक्त जब बाढ़ के दौरान पानी तकरीबन 20 फीट ऊपर तक आ गया है। तब भी अखंड ज्योति में घी डालने के लिए शिविर के लोग नाव से जाते हैं जिससे बराबर ज्योति प्रज्ज्वलित होती रहे। सावन के महीने में स्वामी रामदास रोजाना अपने शिष्यों के साथ नाव से यहां पहुंचकर मचान पर बैठकर रुद्राभिषेक भी कर रहे हैं।
50 फीट की ऊंचाई पर यूके लिप्टस के पेड़ पर स्थापित है अखंड ज्योति
झूंसी। स्वामी रामदास बताते हैं कि जिस तरह से देवरहवा बाबा संसार से दूर रहने के लिए ऊंचे मचान पर बैठकर भक्तों को आशीर्वाद देते थे। उसी आधार पर यहां भी 30 फीट की ऊंचाई पर मचान यूके लिप्टस के पेड़ पर बनाया गया है। इसी तरह अखंड ज्योति भी तकरीबन 50 फीट की ऊंचाई पर है। बगल से ही उतनी ही लंबी लोहे की सीढ़ी लगाई है जिससे ऊपर जाकर अखंड ज्योति में घी डाला जा सके। इसके ठीक सामने 30 फीट ऊंची दूसरी मचान है, जो घास-फूस से बनाया गया है। उसमें देवरहा बाबा की मूर्ति स्थापित है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी सहित देश की अन्य महान विभूतियां देवरहा बाबा से आशीर्वाद लेने के लिए आती थीं। वह कभी भी मंच से नीचे नहीं उतरते थे, बल्कि आशीर्वाद और प्रसाद मंच के ऊपर से ही देते थे।