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RSS News : संघ की शाखाएं बढ़ीं, पहले थी 2713 तो अब काशी प्रांत में हो गईं 2851 शाखाएं

Fri, 28 Mar 2025 12:43 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

संघ काशी प्रांत की शाखाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले काशी प्रांत के अधीन आने वाले प्रयागराज समेत 27 जिलों में 2713 शाखाएं थीं जो एक साल में बढ़कर 2851 हो गई हैं। यह जानकारी प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. एमजे त्रिपाठी ने साझा की।
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस)। - फोटो : अमर उजाला।
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ काशी प्रांत की शाखाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले काशी प्रांत के अधीन आने वाले प्रयागराज समेत 27 जिलों में संघ की 2713 शाखाएं थीं जो एक साल में बढ़कर 2851 हो गई हैं। यह जानकारी संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. एमजे त्रिपाठी ने साझा की।

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बंगलूरू में संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक से लौटे प्रांत प्रचार प्रमुख ने पारित प्रस्तावों और संगठनात्मक कार्यों की जानकारी दी। बताया कि इस वर्ष दशहरा से संघ का शताब्दी वर्ष कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। संघ हर गांव, हर बस्ती में संपर्क अभियान चलाएगा। काशी प्रांत में सवा लाख नए गणवेश बनाने का लक्ष्य है। शाखा स्तर पर इसी माह से इसे शुरू किया जाएगा। पांच से 30 नवंबर तक घर-घर संपर्क अभियान चलेगा।

बैठक से लौटे क्षेत्र कार्यवाह डॉ. वीरेंद्र जायसवाल ने बताया कि प्रतिनिधि सभा ने बांग्लादेश के हिंदुओं पर किए जा रहे अत्याचार पर चिंता जाहिर की है। वहां अंतरिम सरकार से इसे तत्काल रोकने व केंद्र सरकार से सुरक्षा के लिए कूटनीतिक उपाय करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि बैठक में पिछले 100 वर्षों में संघ की गौरवशाली यात्रा, शताब्दी वर्ष के दौरान होने वाली गतिविधियों और भावी योजनाओं पर चर्चा हुई।

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महाकुंभ में एक थाली, एक थैला अभियान से रोजाना 3.5 करोड़ की हुई बचत

प्रतिनिधि सभा की बैठक में प्रयागराज महाकुंभ की भी चर्चा हुई। प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. एमजे त्रिपाठी ने बताया कि महाकुंभ के दौरान एक थाली, एक थैला अभियान से प्रदूषण मुक्त मेला क्षेत्र बनाने से रोजाना 3.5 करोड़ की बचत की बात बैठक में बताई गई। इसके अतिरिक्त नेत्र कुंभ, बौद्ध लामा संतों, वंचित वर्ग से जुड़े संतों, घुमंतू जाति के संतों, नेपाल, भूटान व श्रीलंका से आए श्रद्धालुओं ने संघ के सहयोग से महाकुंभ में स्नान किया।

प्रांत प्रचारक रमेश ने बताया गया कि महाकुंभ में स्नानार्थियों की सेवा के लिए कुल 9,745 स्वयंसेवकों लगाए गए थे। प्रयाग विभाग के 1465 कार्यकर्ता 50 दिन तक मेले में लगे रहे। 2500 स्वयंसेवक देश के विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालुओं को मार्ग बताने के लिए तीन दिन तक सेवा में डटे रहे।
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