जिले में 1,000 से अधिक कार्यशील इकाइयां
उपायुक्त उद्योग का कहना है कि सर्वेक्षण के बाद पाया गया कि जिले में इससे जुड़ी 1,000 से अधिक कार्यशील इकाइयां हैं। इसमें 600 मैन्यूफैक्चरर, 200 स्ट्रीट वेंडर, 200 रेस्टोरेंट और लगभग 12 स्वयं सहायता समूह जुड़े हैं। समोसा बनाने वाली 30 बड़ी इकाइयों की सूची भी विभाग ने तैयार की है।
संस्कृति और पर्यटन के साथ व्यंजन का संगम
इविवि के मध्यकालीन एवं आधुनिक कालीन इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं इतिहासकार डॉ. हेरंब चतुर्वेदी का कहना है कि भारत में व्यंजनों की समृद्ध विरासत है। समोसा दूसरे वर्ग में आता है। 11वीं सदी के इतिहासकार अबुल फल बेहाकी ने अपनी पुस्तक ‘तारीख-ए-बेहाकी’ में ‘सम्बोसा’ का जिक्र किया है। समोसा ईरान से 13वीं सदी में भारत आया। इसका उस समय वहां नाम सनबोसाग था जिसका अर्थ होता है त्रिकोण परतनुमा डिश जिसमें चिलगोजा या मीट के अंश भरावन में होते थे। संस्कृति और मिजाज को समझने वाले समीक्षक और लेखक रविनंदन सिंह का कहना है कि समोसे का गढ़ लोकनाथ रहा है। यहां नमकीन समोसे के साथ मीठे समोसे की जुगलबंदी ने भी इसे जन-जन तक पहुंचाया।