अखाड़ों और अन्य प्रमुख संस्थाओं के साधु-संतों के साथ वार्ता के बाद भूमि आवंटन की रणनीति बनेगी। इस संबंध में सात नवंबर को अखाड़े मेला क्षेत्र में भूमि का निरीक्षण करेंगे। उनकी सहमति पर भूमि का आवंटन होगा। इनके बाद अन्य संस्थाओं को जमीन दी जाएगी। नई संस्थाओं के पंजीकरण और भूमि व सुविधाओं के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 12 नवंबर तक ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। मेला प्रशासन ने 12 नवंबर से ही भूमि और सुविधाओं के आवंटन की योजना बनाई है।
सबसे पहले अखाड़ों को जमीन दी जाएगी। इसके बाद परंपरा के तहत अन्य संस्थाओं को भूमि आवंटित होगी। अखाड़ों को झूंसी की तरफ सेक्टर-20 में स्थापित करने की योजना है लेकिन अभी वहां से पानी पूरी तरह से नहीं निकला है। शेष जमीन भी दलदली है। ट्रैक्टर, जेसीबी और 50 से अधिक मजदूरों लगाकर जमीन को जल्द सुखाने की कवायद की जा रही है लेकिन प्रशासन के सामने दलदली भूमि चुनौती बनी हुई है।
इन्हीं चुनौतियों के बीच मेला प्रशासन ने सात नवंबर को अखाड़ों को भूमि निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया है। मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने बताया कि अखाड़ों को पत्र लिखा गया है। अखाड़ों की सहमति के बाद उन्हें जमीन दी जाएगी। मेलाधिकारी ने बताया कि इसके बाद अन्य संस्थाओं को जमीन आवंटित होगी। इसी क्रम में अन्य प्रमुख संस्थाओं के साधु-संतों के साथ भी मेला प्रशासन की वार्ता संभावित है।