साई के मुद्दे पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की टिप्पणी के बाद साई ट्रस्ट की ओर से उनके खिलाफ दर्ज कराए गए मुकदमे का परिणाम जो भी हो, पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका को लेकर भी कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए हैं। शंकराचार्य पर मुकदमे से आक्रोशित संतों ने इसे सनातन परंपरा पर हमला बताया है। उनका आरोप है कि बड़े से बड़े मामले में घटना के कई घंटे बाद पहुंचने या घटना को नजरअंदाज कर देने वाली पुलिस ने इस मामले में इतनी तत्परता क्यों दिखाई।
संतों का कहना है कि सिर्फ वैचारिक स्तर पर अपनी राय रखने का मामला गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति का नहीं है कि पूरे मामले को सुने और समझे बगैर सनानत धर्म के सर्वोच्च प्रमुख पर अविलंब मुकदमा दर्ज कर दिया जाए। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि किसी अन्य धर्माचार्य के मामले में पुलिस या प्रशासन की ओर से ऐसी तेजी नहीं दिखाई जाती है। शंकराचार्य के पद की गरिमा के अनुरूप उनके बारे में ऐसा कोई निर्णय लेने से पहले सर्वोच्च न्यायालय से अनुमति लेनी चाहिए।
अग्नि अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी रामकृष्णानंद ने कहा कि देश की पुलिस को यह समझना चाहिए कि शंकराचार्य सनातन धर्म के सर्वोच्च आचार्य है। सनातनधर्मियों का मार्गदर्शन उनका कर्तव्य है, सो उन्होंने अपने दायित्व का निर्वाह किया है। उन पर मुकदमे के गंभीर परिणाम होंगे। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामानंद पुरी बोले, सहिष्णुता के मायने कमजोर होना नहीं है। वैसे साईं ट्रस्ट स्वयं भी अब तक यह नहीं स्पष्ट नही कर सका है कि साई किस आधार पर भगवान हैं।
जूना अखाड़े के संरक्षक हरि गिरि ने कहा, बिना जांच-पड़ताल साई ट्रस्ट की ओर से शंकराचार्य पर मुकदमा दर्ज करना सनातन धर्म को कमतर आंकने की गुस्ताखी है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आनंद अखाड़े के महामंत्री शंकरानंद ने कहा, देश में जब प्रत्येक व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है तो फिर शंकराचार्य पर मुकदमा क्यों दर्ज किया गया है। बड़ा उदासीन अखाड़े के मुखिया महंत दुर्गादास कहते हैं, विडंबना है कि शंकराचार्य पर मुकदमा दर्ज कर हमें चुप रहने का संदेश दिया गया है लेकिन ऐसा नहीं होगा।
महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामसेवक गिरि ने दो टूक कहा, शंकराचार्य स्वरूपानंद नहीं सनातन धर्म पर मुकदमा है। महानिर्वाणी के नागा संत अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के आह्वान पर आंदोलन के लिए तैयार हैं। निर्मल अखाड़े के महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री कहते हैं, यह सनातन धर्म पर कुठाराघात है, इसे सहन नहीं किया जाएगा। पंच रामानंदी अखाड़ा निर्वाणी अनी के महंत माधवदास कहते हैं, यह सनातन धर्म की मर्यादा को आहत करने का प्रयास है, इसे संत स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार हस्तक्षेप करते हुए मुकदमा वापस कराए।