गुरुपूर्णिमा पर्व पर मंगलवार को स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने फिर साई राग छेड़ा। साई बाबा को जाति से ब्राह्मण होने का दावा किया। कहा,साई बाबा जाति से पुष्करणा ब्राह्मण और जूना अखाड़े के संत हैं। मंगलवार को प्रवचन के दौरान उन्होंने बगैर किसी का नाम लिए कहा, सनातन धर्म की रक्षा के नाम पर गुरु परंपराओं एवं धर्म गुरुओं का अपमान किया जा रहा है। शिष्य को अपने गुरु का सम्मान एवं उनकी पूजा अर्चना का पूरा अधिकार है।
साईं बाबा संत केशवानंद के चार मढ़ी के शिष्य और इनके गुरु भाई नेपाली बाबा जोधपुर स्थान स्थित दादा दरबार के संस्थापक हैं। पुष्करणा ब्राह्मण साई बाबा का नाम बागमल थाणवी हैं। इनके भाई के पौत्र देवनारायण थाणवी राजस्थान हाईकोर्ट के जज रहे हैं, जो रिटायर होने के बाद आज भी जोधपुर में रहते हैं।
वहीं ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर शंकरचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और गोवर्द्धनपीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि समेत सनातन धर्म के सभी संप्रदायों और अखाड़ों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुई प्रयाग धर्म संसद और कवर्धा धर्म संसद में सर्वसम्मत से कहा गया था, ‘साईं न तो संत, न ही गुरु, न भगवान’ हैं। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती साई को मुसलमान बता चुके हैं।