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अल्लाह की रजा के लिए कुर्बानी आज, घरों में अदा होगी नमाज

Fri, 31 Jul 2020 08:30 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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बकरीद - फोटो : amar ujala
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रब को राजी करने के लिए ईद-उल-अजहा पर शनिवार को कुर्बानी होगी। कोविड-19 की वजह से सामूहिकता पर रोक, मंडियां न लगने व स्लाटर हाउस खोलने की अनुमति न मिलने की वजह से इस बार कुर्बानी में कमी आने की बात कही जा रही है। फिर भी शुक्रवार को तैयारियां पूरी कर ली गईं।
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मस्जिदों में सिर्फ पांच लोगों को ही बकरीद की नमाज के लिए प्रवेश की अनुमति दी गई है, ऐसे में मुस्लिम धर्म गुरुओं ने घरों में ही ईद-ए-कुर्बां की नमाज अदा करने की अपील की है। ईद-उल-अजहा पर भी मस्जिदों, घरों से लेकर बाजारों तक कोरोना का खौफ हावी है। यही वजह है कि बकरीद से एक दिन पहले शुक्रवार को भी करैली, घंटाघर, हटिया, नखास कोहना पर कुर्बानी के निमित्त जानवरों की खरीद फरोख्त के लिए हर वर्ष लगने वाली बकरा मंडी नहीं लग सकी।

कुछ जगहों पर गिनती के कारोबारी बकरा लेकर टहलते देखे गए। मंडियां न लगने और बकरों की आमद कम होने से कुर्बानी में कमी आने की बात कही जा रही है। उधर, सामूहिकता पर रोक की वजह से बकरीद पर नमाज के लिए मस्जिदों में सिर्फ पांच लोगों को ही एक साथ प्रवेश करने की अनुमति दी गई है। शिया धर्म गुरु मौलाना जव्वादुल हैदर जव्वादी ने देर शाम कौम के लोगों से अपील की कि कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर मस्जिदों का रुख न करें। मस्जिदों में बा-जमात नमाज अदा नहीं की जाएगी।
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घरों में ही रहकर ईद-उल अजहा की खास नमाज अदा की जाए। हटिया स्थित मस्जिद के मौलाना नादिर हुसैन ने बताया कि इस बार पर्व पर उत्साह नहीं है। कोरोना वायरस की वजह से मस्जिदों में सामूहिक नमाज अदा नहीं होगी। सांकेतिक रूप से पर्व मनाया जाएगा। लोगों से अपील की गई है कि घरों में ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए नमाज अदा करें।

रियायत न मिलने से मातमी अंजुमनों ने जताई नाराजगी

सामाजिक -धार्मिक संस्था उम्मुल बनीन सोसाइटी के बैनर तले बख्शी बाजार में हुई सुन्नी इत्तेहाद कमेटी व मातमी अंजुमनों की बैठक में ईद -उल- अजहा पर सरकार की ओर से किसी तरह की रियायत न मिलने पर नाराजगी व्यक्त की गई। साथ ही महामारी को देखते हुए गाइड लाइन का पालन करने पर जोर दिया गया। सोसाइटी के महासचिव सैयद मोहम्मद अस्करी ने कहा कि शासन -प्रशासन से ईद -उल -अजहा पर कुछ रियायत की मांग की गई थी, लेकिन कोई दिशा निर्देश नहीं दिया गया। स्लाटर हाउस खोलने की इजाजत न मिलने से बड़े जानवरों की कुर्बानी नहीं हो सकेगी।

शिया सुन्नी इत्तेहाद कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष किताब अली एडवोकेट ने कहा है कि कुर्बानी के जानवरों को न तो खुला छोड़ें और न ही दिखावा करें। ईद -उल -अजहा पर दी जाने वाली कुर्बानी अल्लाह की रजा हासिल करने को की जाए। इसी तरह मोहम्मद शारिक का कहना था कि कुर्बानी के बाद बचे हुए अवशेष को हो गड्ढा खोद कर दफना दिया जाए।

इस मौके पर रिजवान जव्वादी, मिर्जा अजादार हुसैन, शाहिद अब्बास रिजवी, शादाब जमन, मोहम्मद इसराइल, मशहद अली खां, किताब अली,, सैयद मोहम्मद अस्करी, काशान सिद्दीकी, अब्दुल समद, सामिन खान, गुफरान खान, रमीज अहसन, सूफी हसन, हुसैन मेंहदी, शबीह अब्बास जाफरी, अली रजा रिजवी, जिशान खान, अब्दुल जर्रार खान, सामिन अब्बास आदि उपस्थित रहे। 
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