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रूस-युक्रेन युद्ध : भारत नहीं चाहता दो देशों में छिड़े परमाणु जंग, बोले- प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो.अजय सूद

Sun, 04 Dec 2022 08:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रो. सूद ने विज्ञान के क्षेत्र में बच्चों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं पर बात की। बताया कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मिशन चलाया जा रहा है।
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Prayagraj News : प्रोफेसर अजय सूद, वैज्ञानिक सलाहकार, भारत सरकार। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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भारत नहीं चाहता कि दो देशों में परमाणु जंग छिड़े। यह सिर्फ दो देशों नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए खतरा है। अगर ऐसा हुआ तो यह अब तक की सबसे बड़ी तबाही होगी। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार पद्मश्री प्रो. अजय कुमार सूद ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर मीडिया से बातचीत के दौरान यह बात कही।

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यहां राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (नासी) के 92वें वार्षिक अधिवेशन एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि शामिल प्रो. अजय कुमार सूद ने यूक्रेन पर परमाणु हमले से जुड़ी रूस की धमकी पर कहा कि इसे हर हाल में रोकना होगा। भारत डिप्लोमैटिक चैनल से प्रयास में लगा हुआ है कि इसे कैसे रोका जाए और पूरा विश्वास है कि इसमें कुछ सहयोग हो पाएगा। 

प्रो. सूद ने विज्ञान के क्षेत्र में बच्चों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं पर बात की। बताया कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मिशन चलाया जा रहा है। चार सौ बच्चों को स्वच्छ सारथी फेलो के रूप में तैयार किया गया है, जो घर-घर जाकर को कूड़े के इस्तेमाल के बारे में लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इसके साथ ही इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ  साइंस एजूकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) के माध्यम से सरकार बच्चों को विज्ञान के क्षेत्र में लाने के लिए प्रेरित कर रही है।
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एमएएसी के बाद 48 फीसदी बेटियां विज्ञान में बढ़ती हैं आगे
भारत के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने महिला शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग एवं मैथमेटिक्स (स्टेम) में बेटियों को आगे बढ़ाने की जरूरत है। एमएससी तक तो ठीक संख्या में छात्राएं पहुंचतीं हैं, लेकिन इसके बाद महज 48 फासदी महिलाएं ही विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ पाती हैं।


नए आईआईटी खुद को स्थापित करने के लिए कर रहे संघर्ष
क्या देश में नए आईआईटी खोले जाने की जरूरत है? इस सवाल के जवाब में प्रो. सूद बोले कि देश भर में 23 आईआईटी हैं। पहले इन्हें सशक्त बनाने की जरूरत है, फिर नए संस्थान खोले जाने पर विचार हो। पुराने आईआईटी तो खुद को स्थापित कर चुके हैं, लेकिन नए आईआईटी इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी तमाम चीजों की इन्हें जरूरत है। 
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