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ग्रामीण अभियंत्रण सेवा की वरिष्ठता सूची पर रोक

Sun, 01 May 2016 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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लाोक अदालत
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हाईकोर्ट ने ग्रामीण अभियंत्रण सेवा की वरिष्ठता सूची पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों से चार सप्ताह में इस मामले में जवाब तलब किया है। राशी कुमार मिश्र और चार अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति पीसी त्रिपाठी की खंडपीठ ने दिया है।
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याचिका में विभाग की 18 साल पुरानी वरिष्ठता सूची में किए गए संशोधन को चुनौती दी गई थी। याची के वकील अनिल श्रीवास्तव का कहना था कि सुप्रीमकोर्ट ने उसकी याचिका पर मात्र एक व्यक्ति के लिए आदेश दिया था जबकि विभाग ने तदर्थ नियुक्ति पाए सभी लोगों को वरिष्ठता सूची में शामिल कर लिया। याचिका पर प्रतिवाद करते हुए अधिवक्ता सीमांत सिंह ने कहा कि सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि जिन तदर्थ कर्मचारियों की नियुक्ति नियमानुसार विज्ञापन जारी कर और चयन समिति बनाकर हुई है उनको वरिष्ठता का लाभ मिलना चाहिए। सुप्रीमकोर्ट ने एक प्रकार से नियत तय कर दिया है जिसका लाभ सभी को मिलना चाहिए जो भी इस आदेश के दायरे में आते हैं।

उल्लेखनीय है कि ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने सुप्रीमकोर्ट के  आदेश के बाद तैयार संशोधित वरिष्ठता सूची में 1985 में तदर्थ नियुक्ति पर आए कर्मचारियों को भी शामिल कर लिया क्योंकि उनकी नियुक्ति नियमानुसार की गई थी। इस सूची को हाईकोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी गई है कि सुप्रीमकोर्ट ने मात्र याची को ही वरिष्ठता सूची में शामिल करने का निर्देश दिया है। यह सामान्य आदेश नहीं है जबकि विभाग ने इसका लाभ तदर्थ नियुक्ति पाए सभी कर्मचारियों को दे दिया है।  कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में यह स्पष्ट नहीं है कि सूची में संशोधन सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल वाले के लिए किया गया है या सामान्य संशोधन है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पुरानी वरिष्ठता सूची को कभी चुनौती दी गई थी या नहीं। कोर्ट ने वरिष्ठता सूची में शामिल सभी लोगों को नोटिस जारी करते हुए उनको भी अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। 
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