मेला प्रशासन का दावा- पहले से ज्यादा दी जा रही है भूमि
दूसरी ओर मेला प्रशासन का कहना है कि अखाड़ों को पिछले महाकुंभ की तुलना में इस बार अधिक जमीन दी जा रही है, लेकिन अखाड़ों की ओर से 25 प्रतिशत तक भूमि बढ़ाने की मांग की जा रही है, जो संभव नहीं है। विदित हो कि पिछले महाकुंभ में करीब पांच हजार संस्थाओं को जमीन आवंटित की गई थी, जबकि इस बार इनकी संख्या सात हजार से अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। यही कारण है कि महाकुंभ मेले का क्षेत्रफल बढ़ने के बाद भी एकबार फिर जमीन आवंटन से पहले रार शुरू हो चुकी है।
विदित हो कि महाकुंभ में अखाड़ों के बीच विवाद कोई नई बात नहीं है। इससे पूर्व पेशवाई, शाही स्नान का समय निर्धारण, अखाड़ों की प्राथमिकता और सुविधाओं के बंटवारे को लेकर विवाद होते रहे हैं। दरअसल, अखाड़े अपने अधिकारों और परंपराओं को लेकर बेहद संवेदनशील होते हैं, जो अक्सर टकराव का कारण बनते हैं। यही नहीं नए अखाड़ों को शामिल करने और उन्हें अधिकार देने पर पुराने अखाड़े असंतोष व्यक्त करते हैं, जो कई बार विवाद का कारण बने हैं।