संघ के पर्यावरण संयोजक डॉ. अमित पांडेय बताते हैं कि करीब 15 लाख थालियां और थैले यहां पहुंच चुके हैं। इनका कुछ अखाड़ों और कल्पवासियों के शिविरों में वितरण भी शुरू कर दिया गया है। सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने के लिए कपड़ा, जूट आदि से बने और थैले भी जुटाए जा रहे हैं।
देश के विभिन्न प्रांतों से एकत्र की गईं थालियों को महाकुंभ तक लाने का दायित्व देख रहे डॉ. अमित कहते हैं कि मेले या सार्वजनिक स्थल पर ऐसा सेवाकार्य कभी नहीं हुआ। हम 21 लाख थालियां और थैले वितरित करके इस अभियान को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराएंगे।
आम लोगों की सहभागिता से मिली रफ्तार
संघ ने श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए राशि जुटाने की तर्ज पर एक थाली-एक थैला अभियान शुरू करके महाकुंभ से आमजन को जोड़ने की बड़ी कोशिश की है। इसमें निरंतर मिल रही सफलता ने और रफ्तार दी। देशभर से जुटाई गईं थालियां और थैले यहां विहिप कार्यालय, संघ कार्यालय आदि स्थानों पर रखी जा रही हैं।