कुंभपर्व के लिए जहां संत-महात्मा और विभिन्न अखाड़े व्यवस्था में जुटे हैं, वहीं कुंभपर्व के दौरान कल्पवास करने वाले यजमानों के लिए तीर्थपुरोहित भी तैयारियों में जुटे हैं। कल्पवासी मुख्यतया तीर्थपुरोहितों के शिविरों में ही रुककर कल्पवास करते हैं, ऐसे में तीर्थपुरोहितों ने उनकी व्यवस्था में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। कमरे, कोठार बनवाने से लेकर यजमानों की मदद के लिए कर्मचारियों की भी नियुक्ति की जा रही है। इसके अतिरिक्त कई तीर्थपुरोहितों ने ई-रिक्शा सहित आने-जाने के लिए अन्य वाहन भी खरीदे हैं।
अबकी कुंभ पर कल्पवासियों, तीर्थयात्रियों की संख्या भी बढ़ सकती है। कुंभ में स्थायी तौर पर आने वाले कल्पवासियों के अतिरिक्त ऐसे भी तीर्थयात्री आएंगे, जो कुछ ही दिन रुकेंगे और गंगा-संगम स्नान सहित तीर्थ-मंदिरों का दर्शन, पंचकोसी परिक्रमा करने के बाद लौट जाएंगे। ऐसे तीर्थयात्री, तीर्थपुरोहितों के यहां ही ठौर लेंगे। हरी मछली निशान वाले तीर्थपुरोहित राजेंद्र पालीवाल के मुताबिक तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए तीर्थपुरोहितों ने अपनी परंपरागत व्यवस्था में बढ़ोतरी की है।
तीर्थपुरोहित त्रिवेणी प्रसाद मिश्र, उदय पांडेय, अनुज तिवारी कहते हैं, दारागंज, कीडगंज, मालवीय नगर आदि क्षेत्रों में बसे तीर्थपुरोहितों ने यजमानों के लिए कमरे, शौचालय, हाल, कोठार आदि की व्यवस्था की है। तबेलिया निशान वाले तीर्थपुरोहित राजेश तिवारी, हनुमान जी निशान वाले मालवीय नगर के तीर्थपुरोहित रामबाबू शर्मा, भोले दुबे आदि ने कमरों की मरम्मत सहित नए कमरे, शौचालय बनवाए हैं। राधाकृष्ण निशान वाले तीर्थपुरोहित संतोष भारद्वाज, हीरामणि भारद्वाज, शंभूनाथ भारद्वाज कहते हैं, यजमानों के लिए जरूरी सुविधाएं जुटाई गई हैं, ताकि उनकी आस्था, अनुष्ठान में कोई विघ्न न हो।