पीडब्ल्यूडी में अधूरी सड़कों को पूरा दिखाकर करोड़ों का भुगतान
क्रासर
स्टेट लेबर कमेटी की जांच में खुलासा होने के बाद भी नहीं कराई गई रिकवरी, मनगढ़ंत रिपोर्ट शासन को भेजकर की जा रही लीपापोती
मुख्य अभियंता का दोबारा सड़क बनवाने का दावा, गहरे गड्ढों और उखड़ी गिट्टियों से खुली पोल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। पीडब्ल्यूडी की सड़कों के निर्माण में अभियंताओं की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की बंदरबांट का खेल अफसरों के गले की फांस बन सकता है। कुछ सड़कों पर निर्माण पूरा कराए बिना ही कार्यपूर्ण होने का अधिशासी अभियंताओं ने प्रमाण पत्र जारी कर करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया है। जिनके पास न संसाधान थे न अनुभव, उनको ए श्रेणी में सूचीबद्ध कर करोड़ों की लागत वाली सड़कों का चौड़ीकरण-नवीनीकरण कार्य दे दिया गया। स्टेट लेबल कमेटी की जांच में यह खुलासा होने के बाद न रिकवरी कराई गई, न ठेका फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया। अलबत्ता उन सड़कों को दोबारा बनवा लेने की मनगढ़ंत रिपोर्ट शासन को भेजकर लीपापोती की जा रही है। इस मामले की जांच कराई जाए तो कई बड़े ओहदेदारों पर गाज गिरने से इंकार नहीं किया जा सकता।
कुंभ के दौरान बनीं सड़कों की स्टेट लेबल कमेटी की जांच में पांच बड़ी सड़कों का निर्माण अधोमानक पाए जाने के बाद रिजेक्ट कर दिया गया था। इस मामले में फंसे चार अधिशासी अभियंताओं व दर्जन भर से अधिक एई-जेई ने दोबारा सड़कों का मानक के अनुरूप कार्य करवा लेने की रिपोर्ट तो शासन को भेज दी है, लेकिन सचाई जानकर किसी को भी हैरत होगी। मुख्य अभियंता हिमांशु मित्त का कहना है कि स्टेट लेबल कमेटी की जांच में जिन पांच सड़कों का काम रिजेक्ट किया गया था, उन्हें फिर से बनवा लिया गया है। इन सड़कों की अमर उजाला टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि जिला मुख्यालय को चार लेन से जोड़ने की योजना के तहत इलाहाबाद-गोरखपुर मार्ग फूलपुर कस्बे से लेकर सहसों से फूलपुर के बीच पूरी तरह उखड़ा हुआ है। महज चार महीने पहले बनी इस सड़क की गिट्टियां उखड़ चुकी हैं। जगह-जगह गड्ढे बन गए है। कई जगह तो निर्माण का नाम पर खानापूर्ति की गई है। इसी तरह फाफमऊ-सहसों-हनुमानगंज मार्ग के दोबारा निर्माण के नाम पर खानापूर्ति कराई गई है। हंडिया से सोरांव -फूलपुर-हंडिया वाया दमगढ़ा मार्ग का भी यही हाल है। इन सड़कों के निर्माण में बीसी एवं डीवीएम की डेंसिटी बेहद कम पाई गई थी। जांच में पता चला कि जिन ठेकेदारों को इन सड़कों का टेंडर दिया गया था, उनके पास न ए श्रेणी के लायक संसाधन तक नहीं थे।
कोट
जिन सड़कों को स्टेट लेबल कमेटी की जांच में अधोमानक पाया गया था और ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट करने का नोटिस जारी हुआ था, उनको फिर से बनवा लिया गया है। दोबारा सड़कें बना ली गईं, इसलिए कार्रवाई स्थगित कर दी गई। - हिमांशु मित्तल- मुख्य अभियंता पीडब्लल्यूडी