चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
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सूबे के बालिका विद्यालयों में पेयजल के लिए इंडिया मार्का हैंडपंप लगाने पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब अधिकारी अपने कार्यालय और घर पर आरओ का पानी पी रहे हैं तो लड़कियों को हैंडपंप का पानी क्यों दिया जा रहा है। उनको आरओ का पानी क्यों नहीं दिया जा सकता है या फिर अफसरों को ही क्यों न हैंडपंप का पानी पिलाया जाए।
सरकारी बालिका विद्यालयों में शौचालय, पेयजल और बिजली की आपूर्ति पर बलिया, आगरा, अलीगढ़ और महोबा के जिलाधिकारियों की ओर से दाखिल हलफनामे को असंतोषजनक मानते हुए हाईकोर्ट ने इनसे व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा से भी व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। यह भी पूछा है कि पूर्व में दिए उनके आदेश के अनुपालन में क्या कार्रवाई की गई। इसकी पूरी रिपोर्ट अगली तारीख पर दाखिल की जाए।
विनोद कुमार सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की खंडपीठ ने जौनपुर और श्रावस्ती के डीएम द्वारा हलफनामा नहीं दाखिल करने पर नाराजगी जताई है। उनको अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने या स्वयं उपस्थित होने का निर्देश दिया है। तमाम जिलाधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी को कोर्ट ने संतोषजनक नहीं माना है। अदालत ने व्यवस्थाओं की जानकारी के साथ फोटोग्राफ भी मांगे थे। कोर्ट ने कहा था कि समरसेबुल पंप के जरिए पेयजल टंकी में भरा जाए फिर वहां से शुद्ध पीने के पानी की आपूर्ति की जाए। विद्यालयों में बिजली के कनेक्शन दिए जाएं। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।