पहाड़ों पर बारिश और बांधों से छोड़े गए पानी के बाद गंगा-यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सोमवार देर रात तक बढ़ते जलस्तर ने गंगातट के किनारे बसे लोगों की बेचैनी बढ़ा दी है। यदि यह क्रम जारी रहा तो दो से तीन दिन में तटवर्ती इलाकों के आश्रमों और मकानों में बाढ़ का पानी दाखिल हो सकता है।
मध्य प्रदेश के कई बैराज से पानी छोड़े जाने का असर मैदानी इलाकों में दिख रहा है। नई और पुरानी झूंसी में गंगातट के किनारे रहने वाले लोग सचेत हो गए हैं। बरसात में हर साल झूंसी के तटवर्ती इलाकों और कछार के आधा दर्जन गांव टापू में बदल जाते हैं। इससे किनारे पर बसे लोगों को घर से बेघर होना पड़ता है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने पर बदरा-सोनौटी, ढोलबजवा, हेतापट्टी, नीबी-भतकार, ककरा, कोटवां, दुबावल समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। बदरा-सोनौटी मार्ग पर आवागमन ठप हो जाता है और ग्रामीण नावों का सहारा लेते हैं।
पिछले साल भी बाढ़ से एक दर्जन कछारी गांवों में पानी घुस गया था। इससे ग्रामीणों के आशियाने ढह गए थे, जिससे वे सुरक्षित ठिकानों पर चले जाते हैं। महाकुंभ में बने करोड़ों रुपये के स्नान घाट बाढ़ में पूरी तरह डूब गए हैं। छतनाग गांव में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार दो पक्के स्नान घाट दो दिन पहले से ही बाढ़ के पानी में हैं। छतनाग श्मशान घाट के डूबने पर शवों का अंतिम संस्कार अब बारादरी में किया जा रहा है।