गोली मारकर फेंकने के ठीक एक हफ्ते बाद मंगलवार सुबह फाफामऊ के अस्पताल में भर्ती रीतू तिवारी को होश तो आया लेकिन उसके कुछ देर बाद ही वह दोबारा उसकी हालत बिगड़ गई। उसने आंख खोलते ही मां से सबसे पहले अपने साल भर के बेटे तुसन तिवारी के बारे में पूछा।
खबर पाकर थरवई थाने की पुलिस पहुंची। लेकिन उसकी हालत देखकर पुलिस बिना बयान लिए ही लौट गई। थरवई पुलिस ने दोपहर में सरायइनायत और झूंसी इलाके में उसके फरार पति के रिश्तेदारों के घरों में छापेमारी की लेकिन न तो बच्चा मिला और न पति ही पकड़ में आया। परिजनों ने पुलिस को बताया है कि दहेज में सात लाख रुपये की कार नहीं मिलने के कारण पति ने उसकी हत्या की कोशिश की।
सरायममरेज में सहारी बोझ गांव निवासी सुभाष तिवारी ने बेटी रीतू तिवारी का ब्याह झूंसी में कोहना गांव के अरुण तिवारी के साथ किया था। पिछले मंगलवार को रीतू थरवई इलाके में हाइवे के नीचे खून से लथपथ मिली। उसके सिर समेत शरीर में चार गोलियां धंसी थीं। उसे फाफामऊ के अस्पताल में भर्ती किया गया। तीसरे रोज उसकी पहचान हो सकी। मायके वाले आ गए। पति अरुण कंट्रोल रूम को यह फोन करने के बाद से गायब है कि वह यमुना में कूदकर आत्महत्या करने जा रहा है।
उसकी बाइक पुल पर ही मिली जिस पर सुसाइड नोट रखा था। अरुण ने आत्महत्या की या वह कहीं भाग गया है? यह रहस्य बना है। मंगलवार सुबह रीतू को होश आया तो उसने सबसे पहले अपने बेटे तुसन के बारे में पूछा। रीतू की मां का कहना है कि घटना के बाद उसके सालभर के बेटे तुसन के बारे में भी कुछ पता नहीं है।
थरवई और सरायइनायत पुलिस ने रीतू की मां उर्मिला के साथ लीलापुर खुर्द और लीलापुर कला में रीतू की ननद समेत कई रिश्तेदारों के घर छापेमारी की मगर मासूम तुसन नहीं मिला। रीतू के पति अरुण समेत उसके सभी ससुराली फरार हैं। बेटे के बारे में उनके पकड़ में आने पर ही पता चल सकेगा। रीतू की मां उर्मिला का आरोप है कि दहेज में सात लाख रुपये की कार नहीं दे पाने की वजह से अरुण ने रीतू की हत्या की साजिश रच डाली।