प्रदेश कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा जोशी तो कांग्रेस छोड़ भाजपा में चली गईं लेकिन समर्थकों को कांग्रेस में ही छोड़ गईं। माना जा रहा था कि एक-दो दिन बाद ही बड़ी संख्या में उनके समर्थक भी भाजपा में शामिल हो जाएंगे लेकिन कोई नहीं गया। समर्थकों का कहना है कि भाजपा में जाने से पहले रीता ने कार्यकर्ताओं का नहीं, बल्कि अपना नफा-नुकसान देखा। अब वे भाजपा में जाकर पैदल नहीं होना चाहते हैं। कम से कम उन पर पुराने कांग्रेसी का ठप्प तो लगा ही रहेगा। जिनके पास पद हैं, वे भाजपा में जाकर पद नहीं गंवाना चाहते हैं और जिनके पास नहीं है, उन्हें उम्मीद है कि उनकी बारी भी आएगी।
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई), यूथ कांग्रेस औरम महिला कांग्रेस में ज्यादातर महत्वपूर्ण पद रीता जोशी के समर्थकों के पास हैं। रीता भाजपा में जा चुकी है, ऐसे में असमंजस की स्थिति बनी है कि समर्थकों के पास पद रहेंगे या नहीं। अगर पार्टी इसमें छेड़छाड़ नहीं करती है तो इन संगठनों में भाजपा के लिए सेंध लगा पाना मुश्किल होगा। रीता जोशी के समर्थक जानते हैं कि कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए तो वहां महत्वपूर्ण जिम्मेदारी या पद न हीं मिलने वाला। वहां पुराने भाजपाइयों को ही तरजीह दी जाएगी। ऐसे में उनका राजनैतिक कॅरियर प्रभावित हो सकता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यूथ और महिला कांग्रेस के कुछ सक्रिय पदाधिकारियों को तोड़ने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने रीता के पीछे जाने से इनकार कर दिया। वे अब अपना नफा-नुकसान देख रहे हैं। वे जानते हैं कि भाजपा में जाने से रीता जोशी को तो फायदा मिल जाएगा लेकिन वह रीता के समर्थक ही कहलाएंगे।
डॉ. रीता बहुगुणा जोशी के कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने की खुशी में कांग्रेसियों ने शनिवार को आनंद भवन के सामने मिठाई बांटकर जश्न मनाया। कांग्रेसियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और कहा कि रीता के जाने से पार्टी में गुटबाजी खत्म हो गई है। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव मुकुंद तिवारी ने आरोप लगाया कि सांप्रदायिक एवं कट्टरवादी भाजपा को अपनाकर रीता जोशी ने धर्म निरपेक्षता का गला घोट दिया। कहा कि रीता ने निजी स्वार्थ के लिए 11वीं बार दल बदल किया। इस मौके पर पार्टी नेता तारिक सईद अज्जू, जय प्रकाश तिवारी, मंजू संत, अफरोज अहमद, दीप चंद्र शर्मा, निजाम उद्दीन, नरेंद्र पटेल आदि मौजूद रहे।