पार्टी से निकाले जाने पर ऋचा ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
उन्होंने ट्विटर पर लिखा महिलाओं का अपमान करने वाले लंपटों के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष जी डीजीपी ऑफिस पहुंच जाते हैं और महिलाओं के-जन अधिकारों के लिये संघर्ष करने वाली महिलाओं को बिना कारण बताए निष्कासित कर दिया जाता है। महिला विरोधी चेहरा समाजवादी पार्टी
स्वामी प्रसाद मौर्य का विरोध पड़ा महंगा, ऋचा सपा से निष्कासित
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा रामचरित मानस पर की गई टिप्पणी का विरोध करना पार्टी नेता ऋचा सिंह को भारी पड़ गया है। सपा ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए ऋचा सिंह और रोली तिवारी मिश्र को निष्कासित कर दिया गया है। ऋचा ने निष्कासन को पार्टी की महिला विरोधी मानसिकता करार दिया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह ने प्रयागराज पश्चिम विधानसभा से 2017 और 2022 का विधान सभा चुनाव लड़ा था।
चुनाव में हार के बाद वह लगातार पार्टी के खिलाफ बयानबाजी कर रही थीं। इसी तरह पूर्व प्रवक्ता व आगरा दक्षिण से पार्टी प्रत्याशी रहीं डा. रोली तिवारी मिश्रा ने स्वामी प्रसाद मौर्य का बयान आने के बाद निरंतर बयानबाजी कर रही थीं। पिछले दिनों उन्होंने एक ट्वीट में लिखा था कि स्वामी के साथ अखिलेश हैं। मेरे पास बांके बिहारी हैं। अब देखना यह है कि कौन सा अहीर का छोरा किस पर भारी है। इस ट्वीट के बाद महिला सभा की निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जूही सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
दो बार लड़ चुकी हैं विधानसभा का चुनाव
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह ने प्रयागराज पश्चिम विधानसभा से 2017 और 2022 का विधान सभा चुनाव लड़ा था। चुनाव में हार के बाद वह लगातार पार्टी के खिलाफ बयानबाजी कर रही थीं। इसी तरह पूर्व प्रवक्ता व आगरा दक्षिण से पार्टी प्रत्याशी रहीं डा. रोली तिवारी मिश्रा स्वामी प्रसाद मौर्य का बयान आने के बाद निरंतर बयानबाजी कर रही थीं। पिछले दिनों उन्होंने एक ट्वीट में लिखा था कि स्वामी के साथ अखिलेश हैं। मेरे पास बांके बिहारी हैं। अब देखना यह है कि कौन सा अहीर का छोरा किस पर भारी है।
ऋचा के निष्कासन को सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव ने सही ठहराया है। कहा, वह लगातार पार्टी विराेधी गतिविधियों में शामिल थीं। सपा नेता तारिक सईद अज्जू ने भी कहा कि कार्रवाई काफी पहले हो जानी चाहिए थी। दरअसल, मौर्य द्वारा रामचरित मानस को लेकर दिए बयान का इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष रह चुकीं ऋचा सिंह ने विरोध किया था। सपा से दो बार शहर पश्चिमी विधानसभा से चुनाव लड़ चुकीं ऋचा के इस विरोध से सपा की खूब किरकिरी भी हुई। पार्टी के कई नेताओं ने उन्हें निशाने पर भी लिया। इसकी वजह पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव के दौरान गुटबंदी भी रही।
ऋचा ने सपा पर बोला हमला
अध्यक्ष बताएं, पार्टी के खिलाफ क्या किया : निष्कासन के बाद ऋचा ने कई ट्वीट किए। कहा, बिना दूसरे पक्ष को सुने निर्णय को कंगारू कोर्ट कहते हैं। प्राकृतिक न्याय और सामाजिक न्याय विरोधी पार्टी है सपा। ऋचा ने दावा किया कि उनसे स्वामी प्रसाद मौर्य के वक्तव्य का विरोध छोड़ने के लिए कहा गया था। मुझे बिना नोटिस और बिना कारण बाहर निकाला गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी कारण बताने की स्थिति में नहीं हैं, वर्ना मुझे बताया जाए कि स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान के विरोध के अतिरिक्त मैंने पार्टी हितों के खिलाफ कभी कुछ किया हो। मुझे हटाकर पार्टी ने महिला विरोधी मानसिकता दिखाई है। दूसरे दल में जाने की बात पर ऋचा ने कहा कि अभी वह कहीं नहीं जा रहींं।
ऋचा का ट्वीट
महिलाओं का अपमान करने वाले लंपटों के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव डीजीपी ऑफिस पहुंच जाते हैं और महिलाओं के जन अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली महिलाओं को बिना कारण बताए निष्कासित कर दिया जाता है। महिला विरोधी चेहरा समाजवादी पार्टी।