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अर्हता के विवाद में उलझा आरओ/एआरओ का रिजल्ट

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Results of RO ARO tangled in qualification dispute
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प्रयागराज। समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) परीक्षा-2017 का अंतिम चयन परिणाम अर्हता के विवाद में उलझ गया है। परीक्षा के दौरान ही अर्हता में बदलाव के कारण मुख्य परीक्षा में शामिल बड़ी संख्या में अभ्यर्थी टाइट टेस्ट से पहले ही छंट गए। अभ्यर्थियों ने न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी है और आयोग में रिजल्ट फंसा हुआ है। आरओ/एआरओ के 809 पदों पर भर्ती होनी है।
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आरओ/एआरओ-2017 की प्रारंभिक परीक्षा आठ अप्रैल 2018 को आयोजित की गई थी। परीक्षा के कुल पांच लाख 33 हजार 447 अभ्यर्थी पंजीकृत थे और इनमें से तीन लाख 40 हजार 121 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। आयोग ने 14 दिसंबर 2018 को प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट घोषित किया, जिसमें 15342 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया। मुख्य परीक्षा पिछले साल 17, 18 एवं 20 फरवरी को आयोजित की गई।
मुख्य परीक्षा के 11 माह बाद आयोग ने टाइप टेस्ट की तिथि घोषित की। कंप्यूटर टाइप टेस्ट इस साल 18 जनवरी को कराया गया, जिसमें शामिल होने के लिए 817 अभ्यर्थियों को अर्ह पाया गया। अर्ह पाए गए अभ्यर्थियों की संख्या काफी कम थी। अभ्यर्थियों ने पता लगाना शुरू किया कि ऐसा क्यों हुआ तो उन्हें जानकारी मिली कि परीक्षा के दौरान ही आयोग ने कंप्यूटर प्रमाणपत्र संबंधी अर्हता में कुछ बदलाव कर दिए गए हैं। अभ्यर्थियों ने इसके खिलाफ न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी। अगर अर्हता का विवाद न होता तो आयोग फरवरी के पहले ही सप्ताह में रिजल्ट आ गया होता।
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