सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत नहीं था अस्पताल
याची के बड़े भाई ने 30 मई को डॉक्टरों की लापरवाही से हुई मौत की जांच की मांग में डीएम व एसपी चंदौली से शिकायत कर की। डीएम ने सीएमओ को जांच कर उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया। सीएमओ ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। पता चला घटना के समय अस्पताल सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत नहीं था और अस्पताल के एक डॉक्टर आरएन त्रिपाठी एमबीबीएस का छात्र है और 2020 से वह डॉक्टर के रूप में इलाज कर रहा है। इसके बावजूद अस्पताल व डाक्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट ने पहले ही झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने सभी क्लीनिक, अस्पतालों, नर्सिंग होमो का जिले के सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत कराने का आदेश दिया है और गैर पंजीकृत को सील करने का निर्देश दिया है। शिकायत के बाद कार्रवाई करने के बजाय अस्पताल व डॉयग्नोस्टिक सेंटर के पंजीकरण का 29 मई को नवीनीकरण कर दिया गया। घटना 23 मई की है।
अस्पताल का निर्माण भी बिना नक्शा पास कराए बना
याची व उसके बड़े भाई ने तमाम अधिकारियों से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों ने अपने से नीचे के अधिकारी को आदेश देकर इतिश्री कर ली। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। आरटीआई से पता चला कि सूर्या हॉस्पिटल आयुष्मान भारत योजना के तहत डेंगू, बुखार आदि बीमारियों के मुफ्त इलाज के नाम पर सरकार से करोड़ों रुपये का लाभ ले रहा है। याची ने मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव स्वास्थ्य व चिकित्सा से भी शिकायत कर लापरवाह डॉक्टरों व अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है, किंतु कोई कार्रवाई नहीं की गई। अस्पताल लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहा है। यह भी पता चला है कि अस्पताल का निर्माण बिना नक्शा पास कराए किया गया है।
अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
याची का कहना है कि डॉक्टर की लापरवाही से उसकी छह साल, चार साल व छह माह की तीन बच्चियां बिन मां के हो गईं हैं। जिसकी क्षतिपूर्ति धन से नहीं की जा सकती। याची का कहना है कि कानून के खिलाफ कार्य करने वाले सरकारी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाय। अधिकारी सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के निर्देश की अवहेलना कर लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। याची की यह भी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट के डीके जोशी व हाईकोर्ट के राजेश श्रीवास्तव केस की गाइड लाइंस के विपरीत अधिकारी बिना पंजीकरण के अस्पतालों को चलने दे रहे हैं। वे गरीबों के लिए केंद्र व राज्य की स्वास्थ्य योजना का लाभ उठा रहे हैं। अधिकारियों की मिलीभगत से गाइडलाइंस का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। याचिका में राज्य सरकार से इस पर भी कार्रवाई की मांग की गई है।