इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिविल जज (सीनियर डिविजन) के पदोन्नति योग्यता परीक्षा से अयोग्य घोषित किए गए 40 न्यायिक अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट प्रशासन से जवाब तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने प्रयागराज निवासी आशुतोष तिवारी व 39 अन्य न्यायिक अधिकारियों की याचिका पर दिया है। याचियों को 5 वर्ष की निर्धारित सेवा अवधि में महज 18 दिन कम होने के चलते प्रमोशन टेस्ट के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। इस निर्णय को याचियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
याचियों की ओर से से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 14 अगस्त 2026 के नोटिस के तहत 5 साल की सेवा की गणना 31 दिसंबर 2024 तक तय की गई है, जिससे महज 18 दिन कम होने के चलते याची परीक्षा से वंचित हो रहे हैं। दूसरी ओर, हाईकोर्ट प्रशासन की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचियों ने कट-ऑफ डेट पर बिना आपत्ति जताए परीक्षा प्रक्रिया में हिस्सा लिया है। याची अगली भर्ती में पात्र होंगे।
खंडपीठ ने पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट प्रशासन से पूछा कि क्या याचियों को रविवार को होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जा सकती है? कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा में बैठने मात्र से याचियों को विशेष नहीं मिलेगा। इस पर हाईकोर्ट प्रशासन ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने मामले में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 25 सितंबर तय की है।