महाकुंभ में पहुंचने वाले यात्रियों को रोडवेज बसों में सवार होने के लिए मारामारी ही करनी पड़ेगी। इससे निजात मिलने की संभावना लगभग खत्म हो गई है। कुंभ तक इलाहाबाद में इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के तहत टिकट बुकिंग और सीट के आरक्षण की सुविधा शुरू होना अब मुश्किल है।
इसकी वजह यह है कि रोडवेज अब तक इस कार्य को शुरू करने के लिए एजेंसी का चयन तक नहीं कर सका है। जुलाई में घोषित किए गए आईटीएमएस में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इलाहाबाद और आगरा क्षेत्र को चुना था। इसमें भी रोडवेज अफसरों का दावा रहा कि महाकुंभ मेले में यात्रियों को अच्छी सुविधाएं देने के लिए पहले इलाहाबाद में कार्य कराए जाएंगे।
इलाहाबाद क्षेत्र के प्रयाग, सिविल लाइंस, लीडर रोड, जीरो रोड डिपो में सबसे पहले पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम और टिकट बुकिंग सिस्टम को लगाया जाना था। योजना थी कि कुंभ में आने वाले यात्री पवन, गोल्ड लाइन, एक्सप्रेस जैसी समयबद्ध सेवाओं में पहले से ही सीट आरक्षित करा सकेंगे। इससे यात्रियों को सीट के लिए मारामारी नहीं करनी पड़ेगी। बस छूटने के वक्त तक भी यात्री पहुंच जाएंगे तो उन्हें बैठने के लिए सीट मिल जाएगी।
इसके साथ ही सिविल लाइंस बस अड्डे पर उद्घोषणा प्रणाली को चालू किया जाना था। इसके लागू होने से सिविल लाइंस परिसर में यात्रियों को भटकने से निजात मिल जाती। अभी तीन डिपो के एनाउंसमेंट सिस्टम हैं। कई बार एक ही वक्त में तीनों डिपो के एनाउंसमेंट होने से यात्री चकरा जाते हैं। इधर-उधर भागना पड़ता है। लीडर रोड डिपो के यात्री अक्सर प्रयाग या सिविल लाइंस डिपो के काउंटरों पर पूछताछ के लिए पहुंच जाते हैं।
आईटीएमएस के तहत लगने वाली उद्घोषणा प्रणाली में तीनों डिपो की बसों के लिए एक ही जगह से सूचनाएं मिलतीं। मेले में यह सुविधाएं शुरू न होने के कारण यात्रियों के लिए मुसीबत बढ़ जाएगी। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक पीआर वेल्वरिया का कहना है कि योजना के लिए अब तक टेंडर फाइनल नहीं हो सके हैं। इसलिए मेले में कार्य होना मुश्किल है।