काफी समय से लंबित है मामला
सात महीने बाद विधानसभा चुनाव से पहले 15 नवंबर 2021 को परिणाम घोषित कर दिया गया। शिक्षक के लिए 150 में से 97 अंक और प्रधानाध्यापक के लिए 200 में से 130 अंक पाने वालों को सफल घोषित कर दिया। इस मानक अनुसार रिक्त 1894 पदों के 23 गुना 43,610 अभ्यर्थी सफल हो गए। परिणाम जारी होते ही गड़बड़ियों के आरोप लगे और मामला हाईकोर्ट गया।
हाईकोर्ट ने परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया। पीएनपी ने संशोधित परिणाम छह सितंबर 2022 को जारी कर दिया था। उसके खिलाफ भी कुछ अभ्यर्थी हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने 15 फरवरी 2024 को सभी याचिकाएं खारिज कर दीं और संशोधित परिणाम के आधार पर चयन करने को कहा। उसके बाद से मामला शासन में लंबित है।
नियुक्ति देने के लिए मेरिट के अनुसार काउंसलिंग होनी है। इस भर्ती का विज्ञापन जारी करने से पहले आरक्षण निर्धारित नहीं किया गया था। अब तक तय नहीं है कि आरक्षण स्कूल स्तर, जिला स्तर या राज्य स्तर पर लागू किया जाए। आरक्षण का निर्धारण शासन से होना है। आरक्षण के चलते हजारों शिक्षकों की भर्ती पहले से विवादित है। इसलिए इस भर्ती को पूरी करने के लिए विभागीय अधिकारी पहल नहीं कर रहे हैं। मामले को शासन पर टाल रहे हैं। वहीं, परीक्षा उत्तीर्ण करके अभ्यर्थी शिक्षा निदेशालय के बाहर धरने पर बैठे हैं।