इसी प्रकार सपा के कुछ अन्य पार्षदों की सीटों में भी नई आरक्षण सूची में बदलाव किया गया है। ऐसे में सपा नेताओं का आरोप है कि पार्टी नेताओं के समीकरण को बिगाड़ने के लिए इस प्रकार से परिवर्तन किया गया है। इससे सदन में सपा को मजबूत होने से रोकने की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में नगर निगम में समाजवादी पार्टी के कुल 24 पार्षद हैं।
कांग्रेस के पार्षदों ने भी आरक्षण सूची में किए गए बदलाव को देखते हुए अपने वार्ड में चुनाव लड़ने की रणनीति में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। ताकि मिनी सदन में उनकी दावेदारी बनी रहे। कांग्रेेस नेता और मेंहदौरी से पार्षद मुकुंद तिवारी का कहना है कि उनकी सीट महिला की गई है। ऐसे में वह अपनी पत्नी को इस बार चुनावी मैदान में उतारेंगे।
कुछ भाजपा पार्षद भी हुए प्रभावित
दूसरी तरफ भाजपा के ज्यादातर पार्षदों की सीटों में कोई खास बदलाव नहीं किया गया है। नई आरक्षण सूची के मुताबिक भाजपा से पार्षद दीपक कुशवाहा की हरवारा सीट पहले ओबीसी थी, जो इस बार हुए बदलाव के बाद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई है। इसी प्रकार प्रीतम नगर वार्ड में भी बदलाव करते हुए उसे महिला कर दिया गया है। अभी तक इस वार्ड से सरदार अमरजीत सिंह पार्षद हैं। जयंतीपुर वार्ड भी पहले ओबीसी था, इसमें बदलाव करते हुए उसे एससी कर दिया गया है। पुराना कटरा के पार्षद आनंद अग्रवाल की सीट भी महिला हो गई है। हालांकि आनंद ने कहा कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनकी पत्नी सोनिका अग्रवाल चुनाव लड़ेंगी। वह पहले भी इस वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं।
कई वरिष्ठ पार्षदों की सीट में कोई बदलाव नहीं
नगर निगम द्वारा जारी की गई आरक्षण सूची में कई वरिष्ठ पार्षद की सीट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में वे इस बार भी चुनावी रण में अपनी ताल ठोंक सकते हैं। अलोपीबाग से कमलेश सिंह, इसी तरह से राजरूपपुर और ओमप्रकाश सभासद नगर के पार्षद भाई अखिलेश सिंह, मिथिलेश सिंह की सीट में भी बदलाव नहीं हुआ है। भाजपा पार्षद किरण जायसवाल की भी सीट में बदलाव नहीं किया गया है।